स्वार्थ मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है

बहुत समय पहले की बात है एक बड़े ही ज्ञानी संत थे उनके पास लोग दूर दूर से आ कर अपने समस्याओं का हल पूछते थे| संत के दो भक्त थे जो उनके आश्रम में रह कर निरंतर उनकी सेवा करते थे| एक दिन संत ने अपने दोनो भक्तों को बुलाया और कहा की मेरे प्यारे भक्तों आपके लिए एक साधारण सा काम है क्या आप करोगे? यह सुनते ही दोनों ने कहा की प्रभु क्या आपको हमारी भक्ति पर संदेह है जो आप ऐसी बात कर रहें हैं आप आदेश दे कर तो देखिये हम आपको निराश नहीं करेंगे| उनकी बातें सुनकर संत ने कहा की इस कार्य में आपको अपने बुद्धि और विवेक का सहारा लेना है आपका विवेकशील निर्णय ही आपकी सफलता सुनिश्चित करेगा|
आप को यहाँ से पचास कोस जाना है सामने दो बोरियां रखी है एक सामान से भरी है और दूसरी खाली है आप ही चुने की कौन सी बोरी कौन लेकर जाएगा| दोनों ने आपस में विचार विमर्श किया और निर्णय हो गया| निर्णय के अनुसार संत ने एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और कहा जो लायक मिले उसे देते जाना और दुसरे को ख़ाली बोरी देकर उससे कहा रास्ते मे जो उसे अच्छा मिले उसे बोरी मे भर कर ले जाए। दोनो निकल पड़े जिसके कंधे पर समान था वो धीरे चल पा रहा था ख़ाली बोरी वाला भक्त आराम से जा रहा था|
थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट मिली उसने उसे बोरी मे डाल लिया थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे भी उठा लिया
जैसे जैसे चलता गया उसे सोना मिलता गया और वो बोरी मे भरता हुआ चल रहा था और बोरी का वज़न बढ़ता गया उसका चलना मुश्किल होता गया और साँस भी चढ़ने लग गई एक एक क़दम मुश्किल होता गया। दूसरा भक्त जैसे जैसे चलता गया रास्ते में जो भी मिलता उसको बोरी मे से खाने का कुछ समान देता गया धीरे धीरे बोरी का वज़न कम होता गया और उसका चलना आसान होता गया। जो बाँटता गया उसका मंज़िल तक पहुँचना आसान होता गया जो ईकठा करता रहा वो रास्ते मे ही दम तोड़ गया दिल से सोचना हमने जीवन मे क्या बाँटा और क्या इकट्ठा किया हम मंज़िल तक कैसे पहुँच पाएँगे।
जिन्दगी का कडवा सच…
आप को 60 साल की उम्र के बाद कोई यह नहीं पूछेंगा कि आप का बैंक बैलेन्स कितना है या आप के पास कितनी गाड़ियाँ हैं….?
दो ही प्रश्न पूछे जाएंगे …
     1-आप का स्वास्थ्य कैसा है…..?
         और
     2-आप के बच्चे क्या करते हैं….?
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