रामायण तथा महाभारत दोनों में मौजूद थे ये पात्र

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यदि हम रामायण और महाभारत दोनों की बात करें तो हमें इनमें कोई समानता नहीं दिखती है| क्योंकि यह दोनों अलग-अलग काल की घटनाएँ हैं| परन्तु क्या आप जानते हैं कि महभारत तथा रामायण में कुछ ऐसे पात्र हैं जो दोनों में समान रूप से पाए जाते हैं| इनका उल्लेख वेदों तथा पुराणों में भी किया गया है| आइए जानते हैं कि यह पौराणिक पात्र कौन से हैं जो रामायण और महाभारत दोनों में उपस्थित थे|

हनुमान जी

रामायण तथा महाभारत दोनों में मौजूद थे ये पात्र

हम सभी जानते हैं कि हनुमान जी रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं| परन्तु यह सत्य कुछ ही लोगों को ज्ञात है कि हनुमान जी ने महाभारत में भी भूमिका निभाई है| महाभारत में उल्लेख मिलता है कि जब पांडव वनवास के समय जंगल में थे| उस समय हनुमान जी की महाबली भीम से मुलाकात हुई थी| हालाँकि कहीं – कहीं तो इस बात का भी उल्लेख है कि भीम और हनुमान जी दोनों भाई थे| क्योंकि दोनों ही पवन देव के पुत्र थे|

परशुराम

रामायण तथा महाभारत दोनों में मौजूद थे ये पात्र

रामायण में परशुराम जी की भूमिका के बारे में बताया गया है कि जब श्री राम ने देवी सीता के स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ा था| उस समय परशुराम बहुत क्रोधित हुए थे| यदि महाभारत की बात की जाए तो महाभारत में परशुराम भीष्म पितामाह के गुरु बने थे और एक प्रसंग के अनुसार उनका भीष्म के साथ युद्ध भी हुआ था|

जाम्बवंत

रामायण तथा महाभारत दोनों में मौजूद थे ये पात्र

रामायण में जब राम सेतु बना था| उसमें जाम्बवंत ने अहम भूमिका निभाई थी| उन्होंने लंका युद्ध के दौरान हर स्थिति में श्री राम का साथ दिया था| अगर महाभारत की बात की जाए तो एक बार जाम्बवंत और श्रीकृष्ण के मध्य युद्ध हुआ था| जिसमें श्री कृष्ण विजयी हुए थे और हारने के बाद जाम्बवंत ने अपनी पुत्री जाम्बवती का विवाह श्रीकृष्ण के साथ किया था|

मयासुर

रामायण तथा महाभारत दोनों में मौजूद थे ये पात्र

रामायण में मयासुर के बारे में बताया गया है कि मयासुर रावण की पत्नी मंदोदरी के पिता अर्थात रावण के ससुर हैं| मयासुर एक ज्योतिषी और वास्तुशास्त्री थे| महाभारत में भी मयासुर का उल्लेख मिलता है कि मयासुर ने युधिष्ठिर के लिए सभाभवन का निर्माण किया जो मयसभा के नाम से जाना जाता था|

महर्षि दुर्वासा

रामायण तथा महाभारत दोनों में मौजूद थे ये पात्र

रामायण में महर्षि दुर्वासा के बारे में बताया गया है कि महर्षि दुर्वासा राजा दशरथ के भविष्यवक्ता थे| इन्होने रघुवंश के लिए बहुत भविष्यवाणियां भी की थी| वहीं दूसरी तरफ महाभारत में महर्षि दुर्वासा द्रोपदी की परीक्षा लेने के लिए अपने दस हजार शिष्यों के साथ उनकी कुटिया पहुंचे थे।

1 COMMENT

  1. Thank you for sharing this information about परशुराम रामायण और महाभारत दोनों में कैसे मौजूद थे?
    I got the correct answer here.
    Thank you so much again.

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