देवी सरस्वती मंत्र

देवी सरस्वती को साहित्य, कला और स्वर की देवी कहा जाता है। सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने ज्ञान की देवी सरस्वती जी की पूजा की थी।

देवी सरस्वती का मूल मंत्र

ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
संपूर्ण सरस्वती मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

परीक्षा भय निवारण हेतु मंत्र 

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।

स्मरण शक्ति बढाने के लिए मंत्र

ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

उच्च शिक्षा और बुद्धिमत्ता के लिए मंत्र

शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू।

श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

कला और साहित्य के क्षेत्र में सफलता के लिए मंत्र

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमां आद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा पुस्तक धारिणीं अभयदां जाड्यान्धकारापाहां|
हस्ते स्फाटिक मालीकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धि प्रदां शारदां||

सभी बाधाओं के निवारण के लिए मंत्र 

ऐं ह्रीं श्रीं अंतरिक्ष सरस्वती परम रक्षिणी
मम सर्व विघ्न बाधा निवारय निवारय स्वाहा।

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