धरती पर नदी के रूप में क्यूँ आना पड़ा देवी गोदावरी को

भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग धरती पर मौजूद है इन बारह ज्योतिर्लिंगों में तीसरे स्थान पर आता है महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के तट पर स्थित श्री त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग| त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग ब्रम्ह्गिरी पर्वत के निकट स्थित है और ब्रम्ह्गिरी पर्वत से ही गोदावरी नदी का उद्गम होता है| भगवान शिव यूँ तो अनेक नामों से जाने जाते हैं उन अनेक नामों में से एक नाम त्रयम्बकेश्वर भी है शिवजी के तीन नेत्र होने की वजह से उन्हें त्रयम्बकेश्वर कह कर भी पुकारा जाता है| त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा बड़ी ही रोचक है भगवान शिव को महर्षि गौतम तथा गोदावरी नदी के आग्रह पर वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित होना पड़ा था|

एक बार की बात है महर्षि गौतम पर गौ हत्या का झूठा लांछन लगा था और इस झूठे लांछन से आहत होकर महर्षि गौतम ने एक सुदूर वन में जाकर भगवान शिव की आराधना करना शुरू कर दिया था| महर्षि गौतम का निश्चय इतना दृढ था की उन्होंने धुप, गर्मी, ठंढ, बारिश एवं जंगली जीवों का भय त्याग कर अपनी तपस्या जारी रखी| उन्होंने बड़ा कठोर तप किया उनकी भक्ति और कठोर तपस्या की वजह से वन का वो भाग जिसे उन्होंने अपनी तपो भूमि बनाया था वहां दिव्य तेज उत्पन्न हो गया|

तथा उस स्थान पर मौजूद सूर्य के समान तेज दूर दूर से दिखने लगा| उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और मनवांछित वर मांगने को कहा| तब उन्होंने भगवान भोले नाथ से कहा की प्रभु अगर मेरी भक्ति सच्ची है तो यहाँ देवी गंगा को नदी के रूप में भेज दे| जिससे की यह साबित हो सके की मुझ पर लगा गौ हत्या का लांछन झूठा है| और मेरे विरोधियों का मुंह बंद हो जाए तब भगवान शिव ने कहा की हे ऋषि देवी गंगा पहले से ही धरती पर मौजूद हैं और उन्हें वहां से यहाँ स्थानांतरित नहीं किया जा सकता| परन्तु देवी गंगा की जगह देवी गोदावरी यहाँ नदी के रूप में स्वयं विराजमान रहेंगी और उनकी उत्पत्ति यहाँ स्थित ब्रम्ह्गिरी पर्वत से होगी|

भगवान शिव के इतना बोलते ही ब्रम्ह्गिरी पर्वत से जल की अविरल धारा बहनी शुरू हो गयी और गोदावरी नदी के शीतल और पवित्र जल ने नदी का रूप ले लिया| परन्तु महर्षि गौतम तो वहां गंगा को लाना चाहते थे परन्तु गंगा वहाँ नहीं आ सकी और गंगा की जगह गोदावरी के आने से उनपर लगा झूठा लांछन तो मिट गया परन्तु उन्हें संतुष्टि नहीं हुई| उनकी मनःस्थिति समझ कर देवी गोदावरी ने उनके साथ भगवान शिव से वहां ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान होने की विनती की| भगवान् शिव ने उनकी बात सहर्ष स्वीकार कर ली और कहा की आज से यह ज्योतिर्लिंग त्रयम्बकेश्वर के नाम से जाना जाएगा| जो भी मनुष्य सच्चे मन और सही भावना से गोदावरी नदी में स्नान करने के बाद इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेगा उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जायेंगी|

 

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