हिंदुस्तान में वह कौनसी जगह है जहाँ आज भी रात को गूंजती है उस राजकुमार की चीखें

भारत में आज भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ के बारे में लोगों को नहीं पता| ऐसी ही जगहों में से एक है पुणे का शनिवार वाडा| शनिवार वाडा अपनी खूबसूरती और अद्भुत शिल्पकारी के लिए जितना प्रसीद है उतना ही काला इतिहास भी अपने अन्दर समेटे हुए है| शनिवार वाडा 18वी शताब्दी में मराठा राजाओं द्वारा बनाया गया था सन 1743 इसवी में यहाँ के मराठा शाशकों द्वारा बनवाया गया था| सन 1818 तक यहाँ पेशवाओं का राज था जब तक की ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहाँ पर कब्ज़ा नहीं कर लिया| उसके बाद शनिवार वाडा भारत में राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया|सन 1828 में एक भयानक विस्फोट से इस महल का अधिकाँश हिस्सा छतिग्रस्त हो गया था जो की आज के वक़्त में दर्शकों के लिए खोल दिया गया है|

छत्रपति साहू के प्रधानमन्त्री पेशवा बाजीराव ने अपने निवास स्थान की नीव 10 जनवरी 1730, शनिवार को रखी थी इसी वजह से इसका नाम शनिवार वाडा पड़ा|

सबसे पहले पेशवा नाना साहेब थे दुसरे पेशवा उनके बड़े पुत्र विशव राव जो की पानीपत की लड़ाई में मारे गए तीसरे महादेव राव पानीपत की तीसरी  लड़ाई में महादेव राव पर ही रणनीति बनाने की पूरी जिम्मेदारी थी लेकिन उनकी बनाई हुई कुछ रणनीतियां की वजह से युद्ध में मराठो के 70000 सैनिक मारे गए थे।  महादेव राव युद्ध में अपनी भाई की मृत्यु और मराठो की हार के लिए खुद को जिम्मेदार मानते थे। इसी ग्लानी की वजह से कुछ दिनों बाद ही उनकी बिमारी से मृत्यु हो गई।

उनकी मृत्यु के पश्चात मात्र 16 साल की उम्र में नारायण राव को पेशवा बनाया गया।  नाना साहेब के छोटे भाई रघुनाथ राव भी थे जिन्हे की सब राघोबा कहते थे और उनकी पत्नी आनंदीबाई खुश नहीं थे। वो खुद पेशवा बनना चाहते थे उन्हें लगा की नारायण राव की वजह से वो पेशवा नहीं बन सके। इधर नारायण राव के अनुसार रघुनाथ राव ने एक बार उनके बड़े भाई महादेव राव की ह्त्या का प्रयास किया था।इसी बीच कुछ चाटुकारों ने मौका देख कर दोनों के बीच फैली नफरत को और भड़काया इसके परिणामस्वरुप नारायण राव ने अपने काका को घर में ही नज़रबंद करवा दिया।

इससे आहात होकर रघुनाथ राव ने भीलों के मारक काबिले के मुखिया सुमेर सिंह गारदी को सन्देश भेजा| आनंदी बाई ने सन्देश में ” नारायण राव ला धरा” (नारायण राव को पकड़ो) को बदलकर “नारायण राव ला मारा कर दिया” जिसका अर्थ था नारायण राव को मार दो| नारायण राव को इसकी भनक लग गए और वो “चाचा मला बाच्वा” चिल्लाते हुए रघुनाथ राव के कमरे की तरफ भागा पर पहुँचने से पहले ही मार दिया गया| शनिवार वाडा में आज भी नारायणराव की आत्मा भटकती है और रात होते ही वहां चाचा मला बाच्वा की आवाज़ गूंजती रहती है| शनिवार वाडा भारत की खौफनाक जगहों में शुमार है|

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here