इस तरह बने श्री कृष्ण 16,108 रानियों के पति

श्री कृष्ण राधा से प्रेम करते थे। परन्तु उनका विवाह राधा के साथ ना हो पाया। शास्त्रों के अनुसार भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियां थी। आइये जानते हैं कि किस तरह श्री कृष्ण का विवाह इन हजारों कन्याओं के साथ हुआ।

श्री कृष्ण की पहली पत्नी रुक्म‍णि थी। रुक्म‍णि के पिता विदर्भ के राजा थे। उनका नाम भीष्मक था। रुक्म‍णि मन ही मन श्री कृष्ण को पसंद करती थी। परन्तु रुक्म‍णि के भाई उनका विवाह चेदिराज शिशुपाल के साथ करना चाहते थे। परन्तु रुक्म‍णि इस विवाह के लिए तैयार नही थी। इसलिए उन्होंने अपने दिल की बात श्री कृष्ण के आगे रख दी। इसलिए श्रीकृष्‍ण ने रुक्म‍णि के कहने पर उनका अपहरण किया और उनकी इच्छा पूरी की।

श्री कृष्ण का दूसरा विवाह निशादराज जाम्बवान की बेटी जांबवती से हुआ।

एक बार सत्राजीत ने कृष्‍ण पर कई आरोप लगाए। परन्तु वह सारे आरोप झूठे निकले। अपनी मुर्खता पर सत्राजीत को बहुत शर्मिंदगी हुई और उन्होंने अपनी पुत्री सत्यभामा का विवाह कृष्ण से कर दिया।

श्री कृष्ण का चौथा विवाह राजकुमारी मित्रबिंदा के साथ स्वयंवर के दौरान हुआ। इसके बाद कौशल के राजा नग्नजीत के सात बैलों को कृष्ण ने एक साथ गिरा दिया। यह देखकर राजा नग्नजीत श्री कृष्ण से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी बेटी सत्या का विवाह श्री कृष्‍ण से कर दिया। इसके बाद कैकेय की राजकुमारी भद्रा से उनका विवाह हुआ।

श्री कृष्ण का सातवां विवाह भद्रदेश की राजकुमारी लक्ष्मणा से हुआ। लक्ष्मणा श्री कृष्ण को मन ही मन चाहती थी। परन्तु उनका परिवार इस विवाह के विरुद्ध था। इसलिए कृष्ण को लक्ष्मणा का भी अपहरण करना पड़ा।

जब पांडवों के साथ लाक्षाग्रह का हादसा हुआ। श्री कृष्ण उनसे मिलने इंद्रप्रस्थ पहुंचे। इस दौरान अर्जुन के साथ कृष्ण भ्रमण करने निकले। भ्रमण करते हुए श्री कृष्ण की नजर तपस्या कर रही सूर्य पुत्री कालिन्दी पर पड़ी। कालिन्दी श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। श्री कृष्ण उनकी आराधना से मुख न मोड़ सके। इसलिए उन्होंने कालिन्दी से भी विवाह कर लिया।

इस तरह कृष्ण की 8 पत्नियां हुईं- रुक्‍मणि, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा।

श्री कृष्ण कि बाकी 16,100 पत्नियों की कथा बहुत रोचक है। इस कथा के अनुसार एक बार प्रागज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे थे। देवराज इंद्र ने कृष्ण से प्रार्थना की कि भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आम लोगों की खूबसूरत बेटियों का हरण कर उन्हें अपना बंदी बना लिया है। इस संकट से आप ही उन्हें मुक्ति दिला सकते हैं।

भौमासुर को श्राप था कि उसकी मृत्यु किसी स्त्री के हाथों होगी। इसलिए श्री कृष्ण अपनी प्रिय पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाकर गरुड़ पर सवार हो गए और प्रागज्योतिषपुर पहुंचे। श्री कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से भौमासुर और उसके पुत्रों का वध कर दिया। इस तरह उन्होंने 16,100 कन्याओं को भौमासुर की कैद से आजाद कराया। इतने समय तक भौमासुर की कैद में रहने के कारण कोई उन्हें अपनाने को तैयार नहीं था, इसलिए श्री कृष्ण ने सभी को आश्रय दिया। इन सभ्‍ाी कन्याओं को श्री कृष्‍ण ने अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार क‌िया।

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