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विष्णु जी और श्री कृष्ण के पूजन में न करें कभी ये गलतियां

भगवान को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है विधिपूर्वक उनकी पूजा अराधना करना| यदि हम भगवान की प्रतिमा की पूजा विधिपूर्वक करते हैं तो यह निश्चित है कि हमें शुभ फल प्राप्त होंगे| परन्तु थोड़ी सी भी त्रुटि होने पर पूजन अधूरा रह जाता है| इसलिए पूजा करते समय हमें पूजा के नियमों का ध्यान रखना चाहिए|

यदि आपके घर भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की प्रतिमा है तो उनकी पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान अवश्य रखें| यदि आप पूजा के समय इन नियमों को ध्यान में रखेंगे तो पूजा कभी निष्फल नहीं होगी|

स्वयं भोजन करने से पहले विष्णु जी और बाल गोपाल को स्नान करवाएं| स्नान पहले जल से करवाएं और फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं| अब भगवान को वस्त्र पहनाएं| वस्त्रों के बाद आभूषण और फिर यज्ञोपवित (जनेऊ) पहनाएं| स्नान के बाद भगवान को भोग लगाएं| यदि आप यह कार्य किये बिना भोजन करेंगे तो घर में चिंताएं बनी रहती हैं और घर में बरकत भी नहीं होती|

तुलसी के बिना कभी विष्णु जी की पूजा सम्पूर्ण नहीं होती| इसलिए ध्यान रखें कि एक तुलसी का पत्ता नित्य प्रभु के शीश पर अौर प्रसाद में रख कर अर्पित करें| बिना तुलसी के पत्ते के भगवान विष्णु भी पूजा को स्वीकृत नहीं करते हैं|

जब भी भगवान का पूजन करने बैठे तो ध्यान रखें कि सिले अौर जूठे कपड़े पहनकर प्रभु का पूजन न करें|

कभी भी पूजा के दौरान भगवान की प्रतिमा को पुराने फूल अर्पित न करें| प्रतिदिन फूल माला को बदलें अौर बासी पुष्पों को वहां से हटा दें|

पूजा के समय मुख जूठा नहीं होना चाहिए| इसलिए पूजा करने से पहले मुख साफ कर लें| इसके लिए कुल्ला करें अौर ध्यान रखें कि पूजा के समय कुछ न खाएं|

भगवान व‌िष्‍णु और श्री कृष्‍ण के पूजन में घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें|

ध्यान रखें की विष्णु जी की पूजा में चावल का प्रयोग न करें|

यदि आप पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तिल अर्पित करना चाहें तो अवश्य कर सकते हैं|

आरती के पश्चात् परिक्रमा करें| अब नेवैद्य अर्पित करें| भगवान नारायण के पूजन के समय ‘‘ऊँ नमो नारायणाय मंत्र’’ का जप कर सकते है|

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