सूर्य नमस्कार: राज़ आजीवन स्वस्थ रहने का

हम जानते हैं कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक लाभ देने में भी सक्रीय है| योग में सबसे उच्च सूर्य नमस्कार को माना जाता है| सूर्य नमस्कार अकेला ही सभी योग व्यायाम के लाभ पहुंचने का सामर्थ्य रखता है| यह निरोगी काया और स्वस्थ जीवन देता है|

आदित्यस्य नमस्कारन् ये कुर्वन्ति दिने दिने।

आयुः प्रज्ञा बलम् वीर्यम् तेजस्तेशान् च जायते ॥

इसका अर्थ है कि जो लोग प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज बढ़ता है।

सूर्य नमस्कार के लाभ :-
  • शरीर, मन एवं आत्मा को सबल बनता है|
  • शरीर में लचीलापन आता है|
  • हड्डियों को मज़बूती देता है|
  • त्वचा का सौन्दर्य बढ़ता है|
  • वज़न कम करता है|
  • शरीर को फुर्तीला एवं तंदरुस्त बनता है|
  • सूर्य नमस्कार अकेला ऐसा व्यायाम है जिससे 417 कैलोरीज़ खत्म की जा सकती हैं|
  • तनाव दूर क्र शरीर में ऊर्जा भरता है|
  • अनिंद्रा को दूर करता है|
  • मासपेशियां और रीढ़ की हड्डी के लिए फायदेमंद|
  • शरीर में ऑक्सीजन को पर्याप्त मात्रा में पहुंचता है|
सूर्य नमस्कार करने की विधि :-

1. प्रणामासन 

सबसे पहले आपके दोनों पैर एक-दूसरे से जुड़े होने चाहिए। अब दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हो जाएँ और मन शांत कर लें| इस अवस्था में होने के बाद एक मंत्र का उच्चारण करें- ॐ मित्राय नमः 

 

2. हस्तउत्तानासन 

गहरी साँस लें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर तानें| अब हाथों को कमर से पीछे की ओर झुकाते हुए बाजु और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएँ।

3. हस्तपादासन 

अब आगे की ओर झुकें और साँस को धीरे से छोड़ें| हाथों को गर्दन के साथ निचे की ओर झुकाएं और हाथों से पैरों को स्पर्श करें|

4. अश्वसंचालासन 

इस स्थिति में हथेलियों को पृथ्वी पर रखें। साँस को लेते हुए दायें पैर को पीछे की ओर ले जाएँ। अब गर्दन को ऊपर की ओर उठाएँ। अब इस स्थिति में कुछ समय तक रुकें।

5. अधोमुखश्वानासन 

इस स्थिति में साँस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए बायें पैर को पीछे की ओर ले जाएँ। ध्यान रहें इस स्थिति में दोनों पैरों की एड़ियाँ मिली हुई हों। अब गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को गले पर लगाने की कोशिश करें|

6. अष्टांगनमस्कारासन 

अब धीरे धीरे साँस ले और शरीर को भूमि पर पृथ्वी पर रखें| अब घुटने, छाती और ठोड़ी पृथ्वी पर लगा दें। छाती को थोड़ा ऊपर उठायें। अब धीरे धीरे साँस छोड़े।

7. भुजंगासन 

इस स्थिति में धीरे-धीरे साँस लेते हुए छाती को आगे की ओर खींचे। हाथों को सीधे रखें और हथेलियां पृथ्वी पर लगी हों। अब गर्दन को धीरे धीरे पीछे की ओर ले जाएँ। घुटने पृथ्वी का स्पर्श करें तथा पैरों के पंजे खड़े रहें।

8. अधोमुखश्वानासन 

यह स्थिति पांचवीं स्थिति के समान है। इस स्थिति में साँस को धीरे-धीरे छोड़ते हुए बायें पैर को पीछे की ओर ले जाएँ। ध्यान रहें इस स्थिति में दोनों पैरों की एड़ियां परस्पर मिली हुई हों। अब गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कंठ में लगाने का प्रयास करें।

9. अश्वसंचालासन 

यह आसन चौथे आसन जैसा है। इस स्थिति में हथेलियों को पृथ्वी पर रखें। साँस लेते हुए दायें पैर को पीछे की ओर ले जायें। अब गर्दन को ऊपर उठाएँ।

10. हस्तपादासन

यह तीसरे आसन जैसा है। इस स्थिति में आगे की ओर झुकतें हुए साँस को धीरे-धीरे बाहर निकालें। हाथों को गर्दन के साथ, कानों से लगाते हुए नीचे लेकर जाएँ और हाथों से पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटनों को एक दम सीधा रखें।

11. हस्तउत्तानासन 

इस आसान में दूसरे आसन की क्रिया को दोहराना है। इसमें धीरे धीरे साँस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर तानें तथा बाजु और गर्दन को पीछे की ओर झुकायें।

12. प्रणामासन 

यह स्थिति पहली स्थिति के समान रहेंगी। सूर्य नमस्कार को करने के बाद कुछ देर शवासन करें।

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