योग से माइग्रेन, बी.पी. और शुरूआती कैंसर का इलाज

योग हमारे जीवन का एक ज़रूरी हिस्सा है जो हमारा मानसिक, आत्मिक और शारीरिक संतुलन बनाता है| सम्पूर्ण स्वास्थ्य, नियंत्रण वज़न, सौन्दर्य लाभ, उच्च रक्त-चाप, शुरूआती कैंसर से मुक्ति, तनाव से राहत आदि अनेक लाभों की प्राप्ति केवल योग से ही की जा सकती है|

आज-कल माइग्रेन, बी.पी. अथवा कैंसर बहुत ही सामान्य रोग हैं| आइए जानते हैं की किस तरह योग से इन बिमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है:-

माइग्रेन 

माइग्रेन के अंतर्गत सिर के आधे भाग में बीच से तेज़ सिरदर्द होता है| यह दर्द दो घंटे से लेकर दो दिन तक रह सकता है| मरीज को रोशनी और शोर से दूर रहना ठीक लगता है| इसके आलावा उलटी होना, जी मिचलाना तथा शारीरिक गतिविधियों के साथ दर्द का बढ़ जाना शामिल है|

योगासन जो माइग्रेन से छुटकारा दिलाने में सहायक हैं:-

हस्त-पादासन

सीधे खड़े होकर आगे की तरफ झुकने से हमारे नाड़ी तन्त्र में रक्त की आपूर्ति अधिक होती है जिससे वह प्रबल होता है| इससे मन भी अधिक शांत होता है|

सेतुबन्धासन

यह आसन मस्तिष्क को शांत करता है तथा इसके अभ्यास से व्यक्ति चिंता-मुक्त हो जाता है|
 शिशु-आसन
यह आसन नाड़ी तन्त्र को शान्त करता है तथा प्रभावी रूप से पीड़ा को कम करता है|

मर्जरासन

इस आसन से रक्त संचार बढ़ता है और यह मन को शांत करता है|
 पश्चिमोतानासन
बैठ कर दोनों पैरो को आगे की ओर फैला कर, हाथो को पैर की तरफ लेजाते हुए आगे की ओर झुकने से मस्तिष्क शांत होता है और तनाव दूर होता है| इस आसन से सिरदर्द में भी आराम मिलता है|

अधोमुखश्वानासन

नीचे की ओर चेहरा रखते हुए श्वानासन करने से रक्त संचार में वृद्धि होती है जिससे सिर दर्द से मुक्ति मिलती है|
 पद्मासन
पद्मासन में बैठने से मन शांत होता है और सिर दर्द मिट जाता है|
उच्च रक्त-चाप (ब्लड-प्रैशर)
रक्तचाप (ब्लड प्रैशर ) रक्तवाहिनियों में बहते रक्त द्वारा वाहिनियों की दीवारों पर द्वारा डाले गये दबाव को कहते हैं| इसका इलाज कुछ योगासनों से किया जा सकता है:-

शवासन में विश्राम

  • पीठ के बल लेट जाएँ
  • एक साँस ले और अपने पूरे शरीर को सिर से लेकर पैर तक ताने , साँस को रोके, अपनी मुट्ठी बांधें, अपने चेहरे की मांसपेशियों को सिकोडे साथ ही शरीर की सभी मांसपेशियों को सिकोडे
  • साँस को छोड़े और शरीर की सभी मांसपेशियों को शिथिल कर दें
  • इस क्रिया को एक बार फिर से करें
  • अब आप आरामदायक स्थिति में लेट जाए और अपनी आँखे बंद रखे
  • अब अपनी सांसो के प्रति सजग होते हुए साँसों को शांत, हल्का और धीमा करें
  • कुछ मिनटों के विश्राम के बाद शरीर के प्रति सजग हो जाए और 2-4 लंबी गहरी साँसे लें
  • धीरे से उठकर बैठ जाएँ
  • तीन बार ओम का उच्चारण करें

शिशु आसन

  • अपनी एडियों पर बैठ जाएँ | अपने नितंबो को एडियों पर रखते हुए आगे की ओर झुके और माथे को ज़मीन से लगाए
  • अपनी भुजाओ को शरीर के साथ ज़मीन पर रखे और हथेलिओ को आकाश की ओर रखे
  • धीरे से छाती को जंघा की ओर दबाए
  • कुछ देर रुके
  • धीरे-धीरे उठकर अपनी एडियों पर बैठ जाए और विश्राम करें

कैंसर 

कैंसर एक घातक जानलेवा बीमारी है और इससे मरीज जल्दी ठीक भी नहीं हो पाते| इसका कारण लाल और सफेद कोशिकाओं, जोकि नए सेल्स बनाती हैं, उनका बिगड़ना है|

1. सुप्त बद्धकोणासन योग क्रिया :

  • सुप्त बद्धकोणासन योग क्रिया भी कैंसर से निजाद पाने के लिए बेहतरीन योगासन है|
  • शवासन की मुद्रा में पीठ के बल लेट जाएं|
  • बांहों को शरीर के दोनों तरफ पैर की दिशा में फैलाकर रखें, इस स्थिति में हथेलियां छत की ओर होना चाहिए|
  • घुटनो को मोड़कर और तलवों को ज़मीन से लगाकर रखें|
  • दोनों तलवों को नमस्कार की मुद्रा में एक दूसरे के करीब लाकर ज़मीन से लगाएं|
  • जितना संभव हो एड़ियों को जंघा की ओर लाएं
  • इस मुद्रा में 30 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें
  • हाथों से दोनों जंघाओं को दबाएं और धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं|

सावधानियां:

सुप्तबद्धकोणासन का अभ्यास करते समय कुछ सावधानियां रखना चाहिए| घुटनों में तकलीफ होने पर आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए| कमर या उसके निचले भाग में परेशानी की स्थिति में भी इस आसन का अभ्यास उचित नहीं होता है|

2. शवासन योग क्रिया :

शवासन स्वांस का आसन है| यह कैंसर के लिए भी है| ब्रैस्ट कैंसर की समस्या को दूर करने में यह सहायक है|

  • सबसे पहले आसन या चटाई को किसी साफ और समतल जमीन पर बिछा लें।
  • अब आप पीठ के बल लेट जायें, तथा अपने पैरों को बिलकुल सीधा रख लें|
  • अब अपने दोनों हाथों को शरीर से 5 इंच की दूरी पर रखें|
  • दोनों हाथों की हथेलियों को ऊपर की ओर कर लें|
  • पैरो के बीच 1 इंच का अंतर रखें तथा शरीर को ढीला छोड़ दे|
  • आँख और मुंह को बंद कर ले|
  • हलकी-हलकी सांस ले और अपना पूरा ध्यान सांसों पर रखे|
  • इस मुद्रा में 5 से 20 मिनट तक बने रहें|
  • इस आसन को करते समय अगर आपको नींद आये तो लम्बी और गहरी सांसे लें|

सावधानियां:

यह आसन कोई भी कर सकता है मगर पीठ के रोगी या पीठ पर चोट होने पर यह आसान न करें|

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