सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती – त्रिदेवी की गाथा

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त्रिदेवी यानि माँ सरस्वती, माँ पार्वती और माँ लक्ष्मी जो त्रिदेव की पत्नियां हैं| आज हम इन्हीं के बारे में जानेंगे:-

माँ सरस्वती 

ब्रह्मा जी की पत्नी माँ सरस्वती के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं| उनमें से एक यह है कि ब्रह्मा जी ने सरस्वती को अपने मुख से प्रकट किया| माना जाता है कि देवी सरस्वती महालक्ष्मी का प्रधान रूप हैं जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी|

सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती - त्रिदेवी की गाथा

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माँ सरस्वती कई अन्य नामों से भी जनि जाती हैं जैसे कि शारदा, शतरूपा, वाणी, वाग्देवी, वागेश्वरी एवं भारती|

हिन्दू धर्म के कई पुराणों में देवी सरस्वती को ब्रह्मा की पुत्री कहा गया है, जिनसे आकर्षित हो ब्रह्मा ने उनसे विवाह किया था| मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा जोकि सृष्टि के रचयिता हैं, संसार की रचना करते समय अपने मुँह से सरस्वती, सान्ध्य तथा ब्राह्मी को उतपन्न किया|

वे सरस्वती की सुंदरता से आकर्षित हो उठे| यह देख सरस्वती ने हर दिशा में छिपने का प्रयास किया परन्तु ब्रह्मा जी के पांच मुँह थे जो हर दिशा में अपनी दृष्टि बनाये हुए थे| जब सरस्वती आकाश में छिपने गयी तो ब्रह्मा जी के पांचवे मुख ने उन्हें वहां भी खोज निकाला| माना जाता है कि उनका पांचवा मुख काल भैरव ने काट दिया था|

सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती - त्रिदेवी की गाथा

सरस्वती के हर प्रयत्न के बाद विवश हो कर उन्होंने ब्रह्मा जी से विवाह करने का निर्णय लिया| इसके बाद वे दोनों 100 वर्षों तक जंगल में रहे और उन्होंने एक संतान को जन्म दिया जिसे मनु कहा जाने लगा| वह पृथ्वी पे जन्म लेने वाला पहला मानव माना जाता है|

माना तो यह भी जाता है कि ब्रह्मा जी ने जब मानव-रचना की तब वह संतुष्ट नहीं हो पाए| उन्होंने विष्णु जी से आज्ञा लेकर कुछ जल पृथ्वी पर छिड़का और अद्भुत शक्ति स्वरुप सरस्वती प्रकट हुई| जब सरस्वती ने वीणा से मधुर संगीत बजाय तब पृथ्वी को वाणी प्राप्त हुई|

माँ लक्ष्मी
हम ये जानते हैं कि माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं| वे धन, सम्पदा, शान्ति और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। दीपावली पर इनकी पूजा गणेश जी के साथ की जाती है|

सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती - त्रिदेवी की गाथा

माता लक्ष्मी भृगु ऋषि की पुत्री थी| छोटे होते से ही वे भगवान विष्णु के गुणगान सुनती आईं थी| फिर लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु को पति के रूप में पाने के लिए समुद्र के किनारे घोर तपस्या की| एक हज़ार वर्ष बीत गए फिर इंद्र देव उनकी परीक्षा लेने विष्णु रूप में आए और लक्ष्मी जी से वर मांगने को कहा| लक्ष्मी जी ने विश्वरूप दर्शन का आग्रह किया परन्तु इंद्र देव के लिए ये कर पाना असंभव था|

इसके बाद भगवान विष्णु खुद लक्ष्मी जी के पास आए और वर मांगने को कहा| लक्ष्मी जी ने अपनी इच्छा बताई और विष्णु जी ने उन्हें विश्वरूप दर्शन कराए| अंत में भगवान विष्णु ने देवी लक्ष्मी को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया|

सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती - त्रिदेवी की गाथा

एक कथा के अनुसार यह भी कहा जाता है कि माता लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान उतपन्न हुई थी| धन की देवी माँ लक्ष्मी 10 महाविद्याओं में से अंतिम महाविद्या हैं|

माता पार्वती 

पार्वती महादेव की दूसरी पत्नी हैं| माना जाता है कि पार्वती भगवान शिव की पहली पत्नी देवी सती का ही अवतार हैं| माता सती के कई अवतार माने गए हैं जैसे- पार्वती, दुर्गा, काली, गौरी, उमा, जगदम्बा, गिरीजा, अम्बे, शेरांवाली, शैलपुत्री, पहाड़ावाली, चामुंडा, तुलजा, अम्बिका आदि|

सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती - त्रिदेवी की गाथा

माता पार्वती ने नारद जी के कहने पर घोर तपस्या कर भगवान शिव को पति के रूप में पाया था| माता पार्वती को ही गौरी, महागौरी, पहाड़ोंवाली और शेरावाली कहा जाता है। नवरात्रि का त्योहार माता पार्वती जी के लिए ही मनाया जाता है। पार्वती के 9 रूपों के नाम हैं- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी,चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। इन्हे आदिशक्ति भी कहा जाता है|

सरस्वती, लक्ष्मी, पारवती - त्रिदेवी की गाथा

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति.चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति.महागौरीति चाष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना:।।

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