गुरुवार व्रत कथा एवं विधि

गुरुवार (बृहस्पतिवार) के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा फल देते हैं। बृहस्पति की पीड़ा से मुक्ति पाना चाहते हैं तो अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से व्रत आरंभ करके सात गुरुवार तक व्रत रखें।

इस व्रत से धन संपत्ति की प्राप्ति होती है एवं निःसंतानों को पुत्र प्राप्ति होती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी आनंदपूर्वक रहते हैं।

गुरूवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि करके बृहस्पति देव की पूजा करें। पूजन में पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दाल, मुनक्का, पीली मिठाई, पीले चावल और हल्दी चढ़ाएं।

इस दिन केले के पेड़ की भी पूजा की जाती है। कथा पढ़ते और पूजन के समय सच्चे मन से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें।

जल में हल्दी डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाएं और केले की जड़ में चने की दाल और मुनक्का चढ़ाएं।

इसके पास ही दीपक जलाकर पेड़ की आरती करें। गुरूवार के व्रत में दिन में एक समय ही भोजन करना चाहिए। पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा सुननी चाहिए।