सम्पूर्ण सच को जाने बिना किसी के भी व्यवहार के बारे में निर्णय नहीं करना चाहिए

एक बार एक 23 साल का लड़का अपने पिता के साथ रेलगाड़ी का सफर कर रहा था। वह खिड़की से बाहर का नजारा देख कर बहुत खुश हो रहा था।

ख़ुशी से उत्त्साहित हो कर वह चिल्लाया और अपने पिता से कहने लगा कि पापा, वो देखो पेड़ पीछे जा रहे हैं।

अपने पुत्र की बात सुनकर पिता मुस्कुराने लगे।

परन्तु उनके पास जो व्यक्ति बैठा था। वह उस लड़के के ऐसे व्यवहार को देखकर हैरान हो गया। उसे लगा कि वह लड़का दिमागी तौर पर बीमार है।

अभी वह व्यक्ति उस लड़के के बचपने वाले व्यव्हार के बारे में सोच ही रहा था। इतने में वह लड़का फिर चिल्लाया कि देखो पापा, बादल हमारे साथ चल रहे है।

यह देखकर उस व्यक्ति को उस लड़के पर बहुत दया आई। अब उससे रहा नही जा रहा था। इसलिए उसने लड़के के पिता को कहा कि आप अपने बेटे को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते?

लड़के के पिता ने उस व्यक्ति को जवाब दिया कि हम अभी अस्पताल से ही आ रहे है। दरअसल मेरा बेटा जन्म से ही अँधा था और आज ही उसको आँखे मिली है। आज वह पहली बार इस संसार को देख रहा है।

यह सुनकर उस व्यक्ति को अपनी सोच पर बहुत शर्मिंदगी हुई।

यह सोच सिर्फ उस व्यक्ति की नही हमारी भी है। हम भी पूरा सच जाने बिना दूसरों के बारे में गलत सोचने लग जाते हैं।

हर व्यक्ति की अपनी एक कहानी होती है। सम्पूर्ण सच को जाने बिना किसी के भी व्यवहार के बारे में निर्णय नहीं करना चाहिए। हो सकता है कि जो दिख रहा है वह सम्पूर्ण सच न हो।

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