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जब देवी जगदम्बा के क्रोध को संभालने के लिए भक्त ने किया अपने शीश का दान

बहुत समय पहले की बात है भोजपुर जो की अभी के समय में गोपालगंज के नाम से जाना जाता है| वहां हथुआ नामक स्थान पर राजा मननसिंह का राज था मननसिंह वैसे तो बड़ा ही अच्छा शाशक था परन्तु उसके बारे में यह विख्यात था की वह स्वयं को देवी का सबसे बड़ा भक्त मानता था| और उसे इस बात का बड़ा अहंकार था और हम सभी जानते हैं की भक्ति का अर्थ सम्पूर्ण समर्पण है|

भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं है अहंकारी कभी भी सच्चा भक्त नहीं हो सकता है वह सिर्फ और सिर्फ भक्ति का दिखावा ही कर सकता है| राजा मननसिंह के राज्य में रहषु भगत नाम का एक गरीब भी रहता था उसकी दिनचर्या में सुबह उठ कर नित्यकर्म से निवृत हो कर स्नान करने के बाद माता की पूजा किये बिना कोई काम शुरू नहीं होता था

लोग कहते भी थे की रहषु भगत का सबसे बड़ा भक्त है तो वह हंसकर टाल देता और कहता था की मैं तो एक तुच्छ प्राणी हूँ| सबकुछ अच्छे से चल रहा था तभी वहां बड़ा ही भीषण अकाल पड़ा चारो तरफ हाहाकार मच गया| वहां की प्रजा त्राहि त्राहि कर रही थी|

अकाल से राजा मननसिंह बड़ा चिंतित हो उठा तभी उसके एक दरबारी ने बताया की हमारे राज्य में रहषु भगत नाम का एक किसान है| उसके द्वारा काटा हुआ घांस अनाज बन जाता है और लोग उस अनाज को खा रहे हैं तथा उसकी जयजयकार कर रहे हैं|

यह सुनते ही राजा मननसिंह क्रोध से भर उठा की राज्य में उसके बजाये किसी निर्धन किसान की जयजयकार हो रही है| दरबारी ने कहा की वहां के ग्रामीण रहषु भगत को देवी जगदम्बा का सबसे बड़ा भक्त मानते हैं| यह सुनते ही राजा का क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच गया की रहषु भगत जैसा तुच्छ किसान देवी जगदम्बा का सबसे बड़ा भक्त कैसे हो सकता है|

राजा मननसिंह ने अपने सैनिकों को रहषु भगत को पकड़ कर लाने का आदेश दिया| जब उसके सैनिक रहषु भगत को लेकर उसकेर में पहुंचे तो राजा ने उसका अपमान करना शुरू कर दिया राजा ने उसे ढोंगी कहना शुरू कर दिया| राजा मननसिंह ने कहा की अगर सच में वह देवी का भक्त है तो देवी को यहाँ बुला कर अपनी भक्ति साबित करे|

इसपर रहषु भगत ने कहा की महाराज मैं तो एक छोटा किसान हूँ और अगर देवी यहाँ आ गयीं तो राज्य का विनाश हो जाएगा| परन्तु राजा नहीं माना तब हारकर रहषु भगत ने देवी जगदम्बा का ध्यान लगाया और उनसे वहां आने की प्रार्थना की| अपने भक्त की पुकार सुन कर देवी कामख्या से पटना पहुंची जहाँ उन्हें पटन देवी के नाम से जाना जाता है पटना से आमी आयीं जहाँ अम्बिका भवानी के नाम से जानी गयीं|

आमी से देवी थावे पहुंची देवी के वहां पहुँचते ही सारे राज्य का विनाश हो गया राजा मननसिंह की तत्काल मृत्यु हो गयी| तब रहषु भगत ने कहा की माता मेरे मस्तक में विराजित हो जाएँ ताकि यह तबाही रुक सके| उसकी बात मान कर देवी रहषु भगत के मस्तक को फाड़ कर प्रकट हुईं| आज भी थावे में देवी का मंदिर है जहाँ दूर दूर से लोग अपनी मुरादें मांगने आते हैं|

परन्तु अगर उनके दर्शन के साथ रहषु भगत के मंदिर में नहीं गए तो पुण्य प्राप्त नहीं होता कहा जाता है की देवी के साथ साथ रहषु भगत के दर्शन करने अनिवार्य हैं|

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