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आखिर मौली क्यों बाँधी जाती है? क्या है इसका महत्व, नियम, मंत्र और कारण

मौली को रक्षा सूत्र भी कहा जाता है। इसे धार्मिक कार्य तथा पूजा में अनिवार्य माना जाता है। यज्ञ के दौरान मौली बाँधने की परम्परा तो सदियों से चलती आ रही है। परन्तु इसे रक्षा सूत्र के रूप में तब बाँधा जाने लगा, जब भगवान वामन ने असुरों के दानवीर राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसी तरह इंद्र की पत्नी शची ने इंद्र की दायीं भुजा पर रक्षा सूत्र बाँधा था जब देवराज इंद्र वृत्रासुर से युद्ध लड़ने जा रहे थे। इसी रक्षा सूत्र के प्रभाव से देवराज इंद्र इस युद्ध में विजयी होकर वापिस लौटे।

मौली बांधने का मंत्र

‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।’

मौली बाँधने के नियम

पुरुषों तथा अविवाहित कन्यायों की दायीं कलाई तथा विवाहित स्त्रियों की बायीं कलाई में मौली बांधनी चाहिए।

मौली बांधते समय जिस हाथ में मौली बांधी जाती है उस हाथ की मुट्ठी बंद होनी चाहिए।

मौली बंधवाते समय एक हाथ सिर पर होना चाहिए।

मौली बांधते समय ध्यान रखें कि सूत्र को केवल तीन बार ही लपेटे।

मंगलवार और शनिवार का दिन मौली बांधने के लिए शुभ माना गया है।

मंगलवार या शनिवार को ही पुरानी मौली उतार कर नई मौली धारण करें।

उतरी हुई मौली को बहते जल में बहा दें या पीपल के वृक्ष के पास रख दें।

मौली बांधने के कारण

धार्मिक आस्था का प्रतीक माने जाने के कारण मौली को बांधा जाता है।

मौली को मंदिर में मन्नत के रूप में भी बांधा जाता है।

किसी अच्छे कार्य की शुरुआत में संकल्प के लिए भी मौली बांधी जाती हैं।

नई वस्तु खरीदने पर हम उसे मौली बांधते हैं ताकि वह हमारे जीवन में शुभता प्रदान करे।

मौली का महत्व

मौली बांधने से उसके पवित्र और शक्तिशाली बंधन होने का अहसास होता रहता है और इससे मन में शांति और पवित्रता बनी रहती है। व्यक्ति के मन और मस्तिष्क में बुरे विचार नहीं आते और वह गलत रास्तों पर नहीं भटकता है।

कलाई पर मौली बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। उसकी ऊर्जा का ज्यादा क्षय नहीं होता है। शरीर विज्ञान के अनुसार शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती हैं। कलाई पर कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है।

ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक, डायबिटीज और लकवा जैसे रोगों से बचाव के लिए मौली बांधना हितकर बताया गया है।

कमर पर बांधी गई मौली के संबंध में विद्वान लोग कहते हैं कि इससे सूक्ष्म शरीर स्थिर रहता है और कोई दूसरी बुरी आत्मा आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर सकती है।

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