Skip to main content

सावधान। इन चीज़ों को इसी वक़्त अपने घर से निकल फेंकें अगर आप धन्वान बनना चाहते हैं

वास्तु शास्त्र के हिसाब से हम कई तरह की चीज़ें अपने घरों में रखते हैं जो घर का सारा पैसा बहार निकाल देता है. जी हाँ, आपने सही पढ़ा. यह वस्तुएं कभी भी अपने घर में ना रखें। आईये देखते हैं यह कौन कौनसी वस्तुएं हैं और उनके रखने से क्या नुक्सान हो सकता है.

कबूतर का घोंसला

कहा जाता है की जिस घर में कबूतर का घोंसला हो उस घर में कभी ख़ुशी नहीं रहती और इतना ही नहीं उस घर में गरीबी अपना निवास कर लेती है. अगर आपके घर में भी कबूतरों ने घोंसला बनाया हुआ है तो आज ही उसको वहां से कहीं और रख दें.

मधुमखी का छत्ता

मधुमखी ना सिर्फ आपके और आपके परिवार के लिए खतरनाक है बल्कि इनका छत्ता अपनी तरफ ख़राब किस्मत और गरीबी को आकर्षित करता है. अगर आपके घर या बगीचे में छत्ता लगा हुआ है तो आज ही इस को हटवाएं।

मकड़ी का जाल

आपको यह जान के हैरानी होगी की मकड़ी के जाल का मलतब होता है की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं आपके जीवन में पैर रखने वाली हैं. क्या आप ऐसा चाहते हैं? नहीं ना. तो अभी इसी वक़्त इनको साफ़ करिये और हो सके तो ज़्यादा से ज़्यादा अपने घर और दफ्तर को साफ़ रखिये।

टूटा हुआ शीशा

टूटा फूटा शीशा ना सिर्फ बुरा वास्तु माना जाता है, बल्कि यह अपनी तरफ बुरी शक्तियों को भी आकर्षित करता है. यह अपनी तरफ गरीबी को भी खींचता है. इस बात का धयान रखिये की अगर आपके घर में कोई भी टूटा हुआ शीशा है उसको जल्द से जल्द घर ने निकाल फेंकें।

चमगादड़

यह तो बहुत महत्पूर्ण है. चमगादड़ तो बुरी किस्मत, गरीबी, खराब तबियत का प्रतीक है. यही नहीं, इनको मौत लेके जानेवाला या पहुँचानेवाला भी कहा गया है. सावधान! अब इन से छुटकारा पाना तो मुश्किल है, परंतु अगर आपका घर किसी ऐसी जगह है जहाँ चमगादड़ रहती हैं तो इस बात का धयान रखें की अँधेरा होने से तुरंत पहले आप अपने घर के सभी दरवाज़े तथा खिड़कियों को अच्छे से बंद कर दें. क्यों किसी अपशगुन का इंतज़ार करना।

दीवारों में तरेड़ें

अगर आपके घर की किसी भी दीवार में छोटी सी भी तरेड़ें हैं तो इनको तुरंत ठीक करवाएं। यह ना सिर्फ दिखने में बुरी लगती हैं, बल्कि यह अपने साथ बुरी किस्मत और गरीबी लाती हैं.

नलों का टपकना

अक्सर यह देखा गया है की हम सब के घरों में नल टपक रहे होते हैं. इनसे ना सिर्फ पानी की बरबादी होती है बल्कि यह ये भी बताती हैं की आपके घर की सभी खुशियां धीरे धीरे कर के घर से बहार निकल रही हैं. यह तो चिंता की बात है दोस्तों! अगर आपके घर में कोई भी नल टपक रहा है तो तुरन्त इसकी मरम्मत करवाएं।

छत्त

मैंने कोई भी ऐसा घर नहीं देखा जिसकी छत्त साफ़ रक्खी गयी हो. यह सत्य है. घर का कोई भी टूटा-फूटा सामान हम अक्सर अपने घरों की छत्तों पर रख देते हैं. ऐसा करना ठीक नहीं है. अगर आपके घर में भी ऐसा किया गया है तो इसको साफ़ करें। एक गंदी छत्त गरीबी को पनपने का स्थान देती है. इसको जल्द से जल्द साफ़ करें।

सूखे फूल

हम अक्सर अपने घर में सूखे फूल पड़े रहने देते हैं. यह फूल हमें भेंट दिए गए होते हैं या फिर हमने भगवान् तो अर्पित किये होते हैं. धयान रखें की हम ऐसे सूखे फूल घर में न रखें और इनको प्रतिदिन साफ़ करें। सूखे फूल घर में रखने से आप अपनेआप को गरीबी की तरफ ले जा रहे हैं.

मुख्य द्वार

अपने घर के मुख्य द्वार को कभी भी गंदा ना रखें। अगर किसी प्रकार की गन्दगी पड़ी है तो उसको तुरंत हटाएं। टूटा गमला इतियादी कुछ भी वहां ना रहने दें. साफ़ सुथरा द्वार आपके घर में खुशाली लाएगा।

Comments

Popular posts from this blog

आखिर क्या था श्री राम के वनवास जाने के पीछे का रहष्य

रामायण में श्री राम, लक्ष्मण एवं सीता को चौदह वर्षों का वनवास भोगना पड़ा था और इसका कारण राम की सौतेली माता कैकयी को माना जाता है| लेकिन आखिर ऐसा क्या कारण था की महाराजा दशरथ को देवी कैकई की अनुचित मांग माननी पड़ी थी| आइये जानते है उस कथा के बारे में जिसकी वजह से भगवान् राम को वनवास जाना पड़ा और महाराज दशरथ की उस मजबूरी के पीछे के रहष्य के बारे में जिसकी वजह से उन्होंने देवी कैकई को दो वर देने का वचन दिया था| और उन्ही दो वचनों के रूप में उन्हें अपने प्राणों से प्रिये पुत्र राम को वनवास जाने का आदेश देना पड़ा| देवी कैकयी महाराजा दशरथ की सबसे छोटी रानी थी और उन्हें सबसे प्रिय भी थी| दरअसल बहुत समय पहले की बात है जब महाराजा दशरथ देव दानव युद्ध में देवताओं की सहायता करने के उद्देश्य से रणभूमि की और जा रहे थे तो देवी कैकयी ने भी साथ चलने का आग्रह किया| परन्तु महाराजा दशरथ ने ये कह कर मना कर दिया की युद्ध क्षेत्र में स्त्रियों का क्या काम स्त्रियाँ घर में अच्छी लगती हैं उनके कोमल हाथों में हथियार अच्छे नहीं लगते| देवी कैकयी उनकी बातें सुन कर बड़ी आहत हुई और भेष बदलकर महाराजा दशरथ के सारथि के रूप

भगवद गीता (अक्षरब्रह्मयोग- आठवाँ अध्याय : श्लोक 1 - 28)

अथाष्टमोऽध्यायः- अक्षरब्रह्मयोग ( ब्रह्म, अध्यात्म और कर्मादि के विषय में अर्जुन के सात प्रश्न और उनका उत्तर ) अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ भावार्थ : अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत नाम से क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैं॥1॥ अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन । प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ भावार्थ : हे मधुसूदन! यहाँ अधियज्ञ कौन है? और वह इस शरीर में कैसे है? तथा युक्त चित्त वाले पुरुषों द्वारा अंत समय में आप किस प्रकार जानने में आते हैं॥2॥ श्रीभगवानुवाच अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते । भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः ॥ भावार्थ : श्री भगवान ने कहा- परम अक्षर ‘ब्रह्म’ है, अपना स्वरूप अर्थात जीवात्मा ‘अध्यात्म’ नाम से कहा जाता है तथा भूतों के भाव को उत्पन्न करने वाला जो त्याग है, वह ‘कर्म’ नाम से कहा गया है॥3॥ अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम्‌ । अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ॥ भावार्थ : उत्पत्ति-विनाश धर्म वाले सब पद

श्री हनुमान चालीसा और उसका सम्पूर्ण अर्थ - Hanuman Chalisa

जय हनुमान जी की. भक्तों, आपको श्री हनुमान चालीसा के बारे में तो पता ही होगा। हो सकता है आप इसका जाप भी करते हों. परन्तु, क्या आपको चालीसा की सभी दोहों का अर्थ मालूम है? अगर नहीं तो आप नीचे लिखे हुए दोहे और उनके अर्थ के बारे में जान सकते हैं. Hanuman Chalisa ka matlab – What is the meaning of Hanuman Chalisa? दोहा 1 : श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि | बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि || अर्थ: “शरीर गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।” दोहा 2 : बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार | बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार || अर्थ: “हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।” दोहा 3 : जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥ अर्थ: “श्री हनुमान जी!आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कप