विद्यालय में योग के प्रति बच्चों को करें जागरूक – जानिए योग शिक्षा के लाभ

योग जो कि दस हजार साल से भी अधिक समय से प्रचलन में है, सबसे पुराने जीवन्त साहित्य ऋग्वेद में पाया जाता है| प्राचीनतम उपनिषद में विभिन्न शारीरिक अभ्यासों का उल्लेख मिलता है| पतंजलि को योग के पिता के रूप में माना जाता है और उनके योग सूत्र पूरी तरह योग के ज्ञान के लिए समर्पित रहे हैं|

योग में शारीरिक व मानसिक दोनों पक्षों पर जोर देना जरूरी है| आसन शरीर की शुद्धी और मन की शुद्धी के लिए जरूरी है| बुढे या युवा, स्वस्थ या कमजोर सभी के लिए योग का शारीरिक अभ्यास लाभदायक है और यह सभी को उन्नति की ओर ले जाता है| इसके मुख्य उद्देश्य की बात करे तो यह आपके मन और मस्तिष्क को स्थिर रखता है और हमें बिमारियों से बचाने में मदद करता है, जिसके चलते हम स्वस्थ जीवनशैली जीते है| योग हमारे तन, मन तथा आत्मा के लिए लाभदायक है|

जब योग इतना ही लाभदायक है तो हमें इसे करने की शिक्षा अपने बच्चों को भी जरूर देनी चाहिए| योग का महत्व उन्हें सिखाना चाहिए| इससे बच्चों के मन-मस्तिष्क में स्थिरता आती है और वे अपनी पढाई में भी ध्यान केंद्रित कर सकते है| योग के चमत्कार को तो पूरी दुनिया ने स्वीकार किया हैं इसी वजह से दुनिया के विभिन्न देशों में योग शिक्षा को अनिवार्य किया गया है| योग के प्रभाव को देखते हुए आज चिकित्सक एवं वैज्ञानिक योग के अभ्यास की सलाह देते हैं| छात्र जीवन के लिए तो योग बहुत ही आवश्यक है|

आइये जानते है योग क्यों आवश्यक है विद्यार्थियों के लिए- 

पढाई के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए: जिन विद्यार्थियों का पढ़ाई में मन न लगता हो या पढ़कर भी कुछ याद न रहता हो, उन विद्यार्थियों के लिए योग प्रक्रिया चमत्कार जैसा काम करती हैं| सुबह के वक्त योग करने से विद्यार्थियों में एकाग्रता और स्मरण शक्ति बेहतर होती है| इससे तन-मन स्वस्थ और निरोग रहता है और बच्चें सभी क्षेत्र में अव्वल रहते हैं| योग के निरंतर अभ्यास से विद्यार्थियों में पढ़ाई की भावना प्रबल होती है| 
मस्तिष्क में वृद्धि होना: योग का अभ्यास नियमित तौर पर करने से आपका मस्तिष्क शक्तिशाली एवं संतुलन बनता है| वैसे तो बाजार में कई तरह के टॉनिक उपलब्ध है दिमाग को तेज करने के लिए, कोई असर नहीं दिखाते| परन्तु योग एक प्राकृतिक साधन है जिसका कोई मुकाबला नहीं| योग करने के साथ साथ सही खानपान होने से विद्यार्थियों का दिमाग बढ़ सकता है| इससे बच्चों में बचपन से ही अच्छी सोच का विकास होता है और वे सदा सकारात्मक बनते है|
नशीले पदार्थों से मुक्ति: आज कल के समय युवा पीढ़ी में नशीले पदार्थों को लेकर बहुत उत्साह देखा जाता है और उन्हें इसकी आदत पड़ जाती है| जो की उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते है| योग के लगातार किये गए अभ्यास से इन गलत आदतों से छुटकारा मिल सकता है|
लक्ष्य की प्राप्ति:  जो लोग अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाते और यदि उन्हें जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति करनी है तो वे योग का अभ्यास आवश्यक करें| छात्र योग के बल पर अपने मस्तिष्क को शुद्ध करके विचार शक्ति को बढ़ा सकते है जिससे छात्रों को लक्ष्य प्राप्ति में सहायता मिलती है| जो बच्चे शुरू से ही योग करते है वे अपने व्यवहार तथा कार्यो से दूसरों को प्रेरणा देते है और उन्हें जागरूक करते है| योग की सहायता से बच्चे अपने लक्ष्य को जल्दी पहचान पाते है और उसको सफल करने में जुट जाते है|
अब आप समझ सकते है की विद्यालय में योग की शिक्षा क्यों इतनी आवश्यक है| आज के समय में अधिकतर छात्र एवं छात्राएं ऐसे है जो न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी अस्वस्थ रहते हैं| जिसके चलते उनमें शिक्षा का विकास नहीं हो पाता|
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