भूमि पर बैठकर भोजन करने के फायदे

कहा जाता है कि भोजन को जिस भावना के साथ ग्रहण किया जाए, यह वैसा ही फल देता है प्राचीन काल में ऋषि धरती पर आसन बिछाकर उस पर पालथी मारकर बैठते थे और फिर भोजन ग्रहण करते थे। उस समय नीचे बैठकर बोजन करने को बहुत श्रेष्ठ माना जाता था।

भोजन ग्रहण करने से पूर्व हाथ-पैर, मुंह धोकर भोजन के लिए बैठा जाता था। भोजन करने के लिए पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठा जाता था। माना जाता था कि ऐसे भोजन करने से यश और आयु बढ़ती है।

आलथी पालथी लगाकर बैठने को योग में सुखासन कहते हैं। यदि हम सुखासन में बैठकर भोजन करते हैं तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है तथा हम मोटापा, अपच, कब्ज, एसिडिटी आदि पेट की बीमारियों से बचे रहते हैं।

यदि हम धरती पर बैठकर भोजन करते हैं तो रक्त संचार में भी सुधार होता है। कुर्सी पर बैठकर भोजन करने से रक्त संचार पर विपरित प्रभाव पड़ता है। नीचे बैठकर भोजन करने का फयदा यह है कि हम भोजन पर पूर्णत: ध्यान लगा पाते हैं, जिसके कारण भोजन के गुणतत्व बढ़ जाते हैं।

हिन्दू धर्म में भोजन करते वक्त भोजन की सात्विकता के अलावा अच्छी भावना और अच्छे वातावरण और आसन का बहुत महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार भोजन शुद्ध होना चाहिए, उससे भी शुद्ध जल होना चाहिए और सबसे शुद्ध वायु होनी चाहिए। यदि यह तीनों शुद्ध है तो व्यक्ति कम से कम 100 वर्ष तो जिंदा रहेगा।

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