विकास के पथ पर योग

योग एक शारीरिक, मानसिक और आत्मिक प्रक्रिया है जो की भारत से शुरू होकर पश्चिमी देशो में भी प्रचलित हुई परन्तु उस समय यह प्रक्रिया अस्पष्ट थी| कई विज्ञानियों द्वारा की गयी खोज से पता लगा की योग से कई बीमारियों का समाधान किया जा सकता है| अगर योग का रोज़ अध्ययन किया जाये तो यह एक प्रभावकारी लाभ साबित होगा| 1 दिसंबर 2016 को यूनेस्को ने योग को सांस्कृतिक विरासत की उपाधि दी है|

इतिहास

प्रथम श्रेणी 

योग का विकास 5000 वर्ष पूर्व उत्तर भारत में हुआ| इसका उल्लेख ऋग वेद में भी किया गया है| इसकी उन्नति ऋषि मुनियो द्वारा हुई जिन्होंने योग को 200 से ज्यादा धर्म पुस्तकों में प्रकाशित किया| उपनिषद् में यह लिखा है की ज्ञान, कर्म योग और जनना योग से अहंकार को दूर किया जा सकता है|

द्वितीय श्रेणी 

प्रथम श्रेणी में कई ऋषि मुनियों ने अपनी विचारधाराएंँ प्रस्तुत की और द्वितीय श्रेणी में उन विचारों का सुधार किया गया| इस श्रेणी में योग को ‘पतंजलि योग सूत्र’ कहा गया| पतंजलि योग सूत्र ने योग को व्यवस्थित रूप में दर्शाया| इसे राज योग भी कहा गया| पतंजलि द्वारा किये गए उल्लेखों में ‘अष्ट-अंग’ और उसकी प्रक्रिया के बारे में बताया गया| पतंजलि के उल्लेखों का उपयोग आज तक भी किया जाता है|

तृतीय श्रेणी 

पतंजलि के कुछ सदियों बाद, योग एक ऐसा साधन माना गया जो हमारे शरीर को नवजीवन प्रदान करने की क्षमता रखता है| तृतीय श्रेणी में ‘तंत्र योग’ की खोज हुई जो हमारे तन-मन को शुद्ध कर हमें हमारी आत्मा के समीप ले जाता है| यह हमारे ध्यान को केंद्रित करने में सहायता करता है| इसे हथ ( हठ ) योग भी कहा गया|

चतुर्थ श्रेणी 

स्वामी विवेकानंद ने जगह-जगह जाकर लोगों को योग के प्रभावकारी केंद्र की ओर आकर्षित किया| उन्होंने लोगों को भाषण देते हुए जागरूक किया| हथ योग को विकासित करने में कृषणमाचार्य, स्वामी सिवनन्दा और अन्य योगियों का योगदान रहा|कृषणमाचार्य ने मैसोर में पहले हथ योग विद्यालय की स्थापना की| इनके तीन शिष्यों ने हथ योग को प्रसिद्धि दिलाई| स्वामी सिवनन्दा ने 200 से अधिक पुस्तकें लिखी, 9 आश्रम स्थापित किए और कई नई योग सभाएं खोली|

1947 में इंद्रा देवी ने हॉलिवुड में योग स्टूडियो की स्थापना की जिससे पश्चिमी देशो में हथ योग को प्रसिद्धि मिली| उपयोगियों  की संख्या में बढ़ोतरी देखी गयी और हथ योग के नए रूपों की खोज की गयी|

योग के लाभ 

योग हमारे जीवन का एक ज़रूरी हिस्सा है जो हमारा मानसिक, आत्मिक और शारीरिक संतुलन बनाता है|

संपूर्ण स्वास्थ 

योग से विभ्भिन प्रकार की बीमारियों का समाधान होता है| योग से शरीर में लचीलापन आता है जो हमारे शरीर को सशक्त बनाता है| अतः स्वस्थ शरीर से ही आत्मिक शांति प्राप्त की जा सकती है|

नियंत्रित वज़न 

मोटापा कई बीमारियों को निमंत्रण देता है और योग मोटापे की जड़ तक जाकर उसको नियंत्रित करता है जिससे की शरीर को बीमारियों से मुक्ति मिलती है|

तनाव से मुक्ति 

आज कल की पीढ़ी तनाव से सामना कर रही है और योग इस भागदौड़ भरी दिनचर्या को नियमित रूप से चलाने में सहायता करता है|

सौन्दर्य लाभ 

त्वचा की कई समस्याओं का मुख्य कारण प्रदूषण है| प्रदुषण से एक्ने, कैंसर आदि हो सकते है| योग रोज़ाना करने से इन समस्याओं से बचाव किया जा सकता है|

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