चन्दन के तिलक का धार्मिक तथा वैज्ञानिक महत्त्व

हिन्दू धर्म में बहुत सी परम्पराएं हैं। सब परम्पराओं का अपना ही महत्व है। इनमें से एक परम्परा है माथे पर तिलक लगाना| भारत में पूजा के बाद माथे पर तिलक लगाया जाता है और यह परम्परा सदियों से ही चला आ रही है। पूजा के बाद या किसी धार्मिक कार्य के बाद अगर तिलक ना लगाया जाए तो पूजा या धार्मिक कार्य को अधूरा माना जाता है। यह तिलक चन्दन, कुमकुम, हल्दी या भस्म आदि का होता है। तिलक लगाने के पीछे आध्यात्मिक भावना के साथ साथ कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। चन्दन का तिलक दूसरों के सामने दिखावे के लिए नही लगाया जाता बल्कि चन्दन का तिलक अपने महत्व के कारण लगाया जाता है।

धार्मिक महत्व

धार्मिक तौर पर देखा जाए तो जब हम चन्दन भगवान को अर्पण करते हैं तो उसका भाव यह है कि हमारा जीवन भगवान की कृपा से सुगन्ध से भर जाये तथा हमारा व्यवहार शीतल रहे।

चन्दन का तिलक ललाट पर या छोटी सी बिंदी के रूप में दोनों भौहों के मध्य लगाया जाता है। हिन्दू धर्म में चन्दन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।

माना जाता है कि चन्दन का तिलक लगाने से मनुष्य के पापों का नाश होता है तथा हम कई तरह के संकटों से बच जाते हैं।

तिलक लगाने से ग्रहों की शांति होती है।

चन्दन का तिलक लगाने से सौभाग्य में बढ़ोतरी होती है तथा घर अन्न-धन से भरा रहता है।

वैज्ञानिक महत्त्व 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो चन्दन का तिलक हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। चन्दन के तिलक के वैज्ञानिक लाभ कुछ इस तरह हैं-

चन्दन का तिलक ललाट पर नियमित रुप से लगाने पर मस्तक पर तरावट आती है। इससे शांति व सुकून अनुभव होता है।

यह हमें कई तरह की मानसिक बिमारियों से बचाता है।

चन्दन का तिलक सिर दर्द की समस्या से भी राहत दिलाता है।

इससे दिमाग में सेराटोनिन और बीटा एंडोर्फिन का स्राव संतुलित तरीके से होता है जिससे हमारी उदासी कम होती है तथा मन में उत्साह जागता है।

तिलक लगाने से व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है तथा आत्मविश्वास और आत्मबल में वृद्धि होती है।

चन्दन का तिलक लगाने से त्वचा शुद्ध रहती है।

 

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