चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मावती का इतिहास

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इतिहास के अनुसार रानी पद्मावती का असली नाम पद्मिनी था| पद्मिनी सिंघल प्रदेश के राजा गंधर्वसेन और रानी चम्पावती की पुत्री थी पद्मावती के पास हीरामणि नामक तोता था जो की उन्हें प्राणों से भी प्रिय था| राजकुमारी पद्मिनी बहुत ही सुन्दर थी उनके बड़े होने पर उनकी सुन्दरता के चर्चे चारों ओर होने लगे|

राजा गंधर्वसेन ने राजकुमारी पद्मिनी के स्वयंवर का आयोजन किया जिसमे की सभी राजाओं को आमंत्रित किया गया| सभी राजाओं में मलखान सिंह नाम का एक राजा भी था जिसकी ख्याति चारों तरफ फैली ही छोटे से राज्य का शाशक होने के बावजूद उसे स्वयंवर जितने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था| वहीँ चितौड़ के राजा रावल रतन सिंह एक पत्नी होने के बावजूद उस स्वयंवर में पहुंचे हुए थे| रतन सिंह ने मलखान सिंह को बराबर की टक्कर देते हुए पराजित किया और पद्मावती उनकी रानी बन गयी| रावल रतन सिंह अच्छे शाशक होने के साथ साथ कला प्रेमी भी थे|

उनके राज्य में राघव चेतन नामक एक संगीतकार भी था जो की उनके दरबार की शोभा था परन्तु संगीतकार होने के साथ साथ उसका झुकाव काली शक्तियों की ओर भी था| उसकी इस काले सत्य के बारे में लोगों को तब पता चला जब एक दिन स्वयं राजा ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया|

क्रोध में आकर राजा ने उसे मुंह काला कर गधे पर बिठा कर सारे राज्य में घुमाया इस अपमान से आहत होकर वह राज्य छोड़ कर जंगलों में चला गया| उसी समय दिल्ली का सुलतान अल्लाउद्दीन खिलज़ी भी शिकार के लिए उसी जंगल में पहुंचा हुआ था| यह जानते ही राघव चेतन के मन में प्रतिशोध की भावना बलवती हो उठी उसने अपनी बांसुरी की मधुर तान लगायी| काले जादू की वजह से सुलतान अल्लाउद्दीन खिलज़ी सम्मोहित हो गया और उसे अपने पास बुलाया|

सुलतान अल्लाउद्दीन खिलज़ी के पास पहुँचने पर उसने उसके सम्मुख रानी पद्मावती की सुन्दरता का बखान किया| रसिक मिजाज़ सुलतान ने रावल रतन सिंह के पास जाकर रानी पद्मावती को देखने की गुजारिश की उसने कहा की रानी तो मेरी बहन के सामान है|

उसकी चाल न समझ कर राजा ने उसे रानी पद्मिनी की छवि आईने में देखने की अनुमति दे दी रानी के सुन्दर रूप को देख कर सुलतान अल्लाउद्दीन खिलज़ी मोहित हो उठा और धोखे से आक्रमण कर राजा को बंदी बना लिया| वहीँ जब रानी को पता चला तो उन्होंने सैनिकों को आखिरी समय तक लड़ने का आदेश दिया और महल की सारी स्त्रियों को लेकर एक विशाल चिता सजाई और उसमें कूद गयी|

पहले के समय में राजपूतों की स्त्रियाँ जौहर करती थी ताकि उनकी इज्ज़त बची रहे मौत भले ही आ जाए पर उनके पति के अलावा कोई और उन्हें हाथ भी ना लगा सके| सभी सैनिक अपनी आखिरी सांस तक लड़े जब सभी को मार कर सुलतान अल्लाउद्दीन खिलज़ी किले में पहुंचा तो उसे रानी पद्मावती तो नहीं मिली बल्कि उनकी चिता की राख ही मिली|

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