व्रत कथा - विधि

शुक्रवार को कैसे करें मां दुर्गा की पूजा

देवी की आराधना का अर्थ है शक्ति की आराधना और कहते हैं कि शक्ति का रंग है लाल, इसीलिए देवी दुर्गा की आराधना में लाल रंग का बहुत महत्व है। दुर्गा जी की पूजा...

गुरुवार व्रत कथा एवं विधि

गुरुवार (बृहस्पतिवार) के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और मनचाहा फल देते हैं। बृहस्पति की पीड़ा से मुक्ति पाना चाहते हैं...

भगवान शिव के प्रदोष व्रत रखने से होती है मोक्ष की प्राप्ति

प्रदोष व्रत भगवान शिव के लिए रखा जाता है| यह व्रत बहुत्त मंगलकारी होता है तथा इस व्रत को त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है| यदि इस दिन आप व्रत रखें तो आपको भगवान...

हनुमान जी की पूजा कैसे की जाती है? यहाँ जानिए

हनुमान जी श्रीराम जी के सबसे बड़े भक्त हैं। हनुमान जी पवनपुत्र के अलावा भगवान शिव के 11वें अवतार के रूप मेंभी जाने जाते हैं। हनुमान जी अपने माता-पिता के बड़े लाडले थे अतः...

क्यों कहते है कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली – क्यो मनाई जाती है देव...

कार्तिक पूर्णिमा सभी पूर्णिमाओं में श्रेष्ठ  मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने देवलोक पर हाहाकार मचाने वाले त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का संहार किया था। उसके वध की खुशी...

हनुमान जी की पूजा से शांत रहते हैं शनिदेव

हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार अगर किसी भी संकट या परेशानी में हनुमानजी को याद किया जाए तो वह विपदा को हर...

नृसिंह जयंती व्रतकथा

नृसिंह जयंती को हिन्दू धर्म में बहुत धूम - धाम से मनाया जाता है| इस दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नृसिंह का अवतार लिया था| इसीलिए यह दिन नृसिंह की जयंती...

गोवर्धन पूजा और व्रत कथा

गोवर्धन पूजा की परम्परा श्री कृष्ण ने महाभारत काल में शुरू की थी| गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन की जाती है| गोवर्धन पूजा से एक कथा जुड़ी हुई है जो इस प्रकार है :- एक बार...

कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा

कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है| कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली या त्रिपुरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है| इस दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु जी की सहायता...

शरद पूर्णिमा व्रत कथा

एक समय की बात है| एक साहूकार की दो पुत्रियां थी| उसकी दोनों पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थी| परन्तु दोनों के व्रत रखने में अंतर था| साहूकार की बड़ी पुत्री विधिपूर्वक पूरा व्रत करती थी जबकि...