भगवद गीता

भगवद गीता (भक्तियोग- बारहवाँ अध्याय : श्लोक 1 – 20)

अथ द्वादशोऽध्यायः- भक्तियोग (साकार और निराकार के उपासकों की उत्तमता का निर्णय और भगवत्प्राप्ति के उपाय का विषय) अर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- जो अनन्य प्रेमी...

भगवद गीता (विश्वरूपदर्शनयोग- ग्यारहवाँ अध्याय : श्लोक 1 – 55)

अथैकादशोऽध्यायः- विश्वरूपदर्शनयोग ( विश्वरूप के दर्शन हेतु अर्जुन की प्रार्थना ) अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम्‌ । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥ भावार्थ : अर्जुन बोले- मुझ पर अनुग्रह करने के लिए आपने जो परम गोपनीय अध्यात्म विषयक...

भगवद गीता (विभूतियोग- दसवाँ अध्याय : श्लोक 1 – 42)

अथ दशमोऽध्याय:- विभूतियोग ( भगवान की विभूति और योगशक्ति का कथन तथा उनके जानने का फल) श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥ भावार्थ : श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी...

भगवद गीता (राजविद्याराजगुह्ययोग- नौवाँ अध्याय : श्लोक 1 – 34)

अथ नवमोऽध्यायः- राजविद्याराजगुह्ययोग ( प्रभावसहित ज्ञान का विषय ) श्रीभगवानुवाच इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌ ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः...

भगवद गीता (अक्षरब्रह्मयोग- आठवाँ अध्याय : श्लोक 1 – 28)

अथाष्टमोऽध्यायः- अक्षरब्रह्मयोग ( ब्रह्म, अध्यात्म और कर्मादि के विषय में अर्जुन के सात प्रश्न और उनका उत्तर ) अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ भावार्थ : अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम!...

भगवद गीता (ज्ञानविज्ञानयोग- सातवाँ अध्याय : श्लोक 1 – 30)

अथ सप्तमोऽध्यायः- ज्ञानविज्ञानयोग ( विज्ञान सहित ज्ञान का विषय ) श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्त चित तथा अनन्य भाव...

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