माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान के इन फायदों के बारे में जाने

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शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा को पुण्य की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण अवसरों में से एक माना गया है। माना जाता है कि माघ मास में स्नान और दान करना सर्व श्रेष्ठ है। इस मास की पूर्णिमा को दान और गंगा स्नान करना बड़ा ही शुभकर माना गया है। रामायण में भी लिखा है कि भरत ने कौशल्या से कहा कि यदि राम को वन भेजे जाने में उनकी जरा सी भी सम्मति रही हो तो बैशाख, कार्तिक और माघ पूर्णिमा के स्नान सुख से वह वंचित रहें।

और इन तीनो पूर्णिमा पर स्नान का पुण्यफल मनुष्य को उच्च गति दिलाता है| उन्हें सबसे नीच गति प्राप्त हो। भरत के इतना कहते ही कौशल्या ने भरत को गले लगा लिया। यह प्रसंग माघ पूर्णिमा के महत्व को दर्शाता है। माघ पूर्णिमा के योग में कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होता है और इसे पुण्य योग के नाम से भी जाना जाता है। माघ पूर्णिमा पर स्नान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त सभी दोषों से मुक्ति मिलती हैं।

माघ पूर्णिमा स्नान को सिर्फ शास्त्रों में ही नहीं बल्कि इसकी वैज्ञानिकों ने भी प्रमाणित किया है। माघ के महीने में ऋतु परिवर्तन होता है इसलिए नदी के जल में स्नान करने से रोगों से मुक्ति मिल जाती है। मौसम के बदलाव का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े इसलिए माघ के महीने में स्नान को महत्वपूर्ण मन जाता है। माघ पूर्णिमा पर गंगा के तट पर स्नान के लिए श्रधालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

ब्रह्मवैवर्तपुराण में भी माघी पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करने का प्रसंग वर्णित हैं इसके अनुसार इस पावन काल में गंगाजल का स्पर्श भी कर लेने पर स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार पुराणों में मान्यता है कि भगवान विष्णु जितना अधिक प्रसन्ना माघ स्नान करने से होते हैं उतना किसी और चीज़ से नहीं होते| माघ पूर्णिमा पर जो भी यज्ञ, तप तथा दान किया जाता है उसका विशेष महत्व है।

इस दिन सत्यनारायण स्वामी पूजन और सुमिरन किया जाता है। इस स्नान के साथ भोजन, वस्त्र, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल तथा अन्न आदि का दान करना बड़ा ही पुण्य का काम माना जाता है। माघ पूर्णिमा में भगवान मधुसूदन की पूजा प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी या घर पर ही स्नान करके ही करनी चाहिए।

माघ पूर्णिमा के अवसर पर भगवान सत्यनारायण स्वामी कि कथा की जाने का प्रावधान है सत्यनारायण स्वामी की पूजा में केले के पत्ते, फल, पंचामृत, पान, सुपारी, तिल, कुमकुम, मोली, रोली, दूर्वा के उपयोग को जरूरी माना गया है। सत्यनारायण की पूजा में चढ़ाया जाने वाला पंचामृत दूध, शहद केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा मिलाकर तैयार किया जाता है साथ ही आटे को भून कर उसमें चीनी मिला हुआ चूरमे का प्रसाद बना कर इस का भोग लगाया जाता है।

सत्यनारायण की कथा के बाद उनका पूजन होता है, इसके बाद देवी लक्ष्मी, महादेव और ब्रह्मा जी की आरती कि जाती है और चरणामृत लेकर प्रसाद सभी को दिया जाता है। माघ के महीने में स्नान, दान तथा धर्म-कर्म का विशेष महत्व होता है। इस महीने की हर एक तीथि बहुत ही फलदायक मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार अगर माघ के महीने में किसी भी नदी के जल में स्नान किया जाय तो उसे गंगा स्नान करने के समान माना गया है।

माघ माह में स्नान का सबसे अधिक पुण्य प्रयाग के संगम तीर्थ पर स्नान करने से प्राप्त होता है। माघ पूर्णिमा पर यदि गंगा में स्नान किया जाए तो सभी पापों एंव संताप का नाश होता है साथ ही मन एवं आत्मा शुद्ध होती है। इस दिन स्नान करने वाले भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करते है।माघ स्नान पुण्यशाली होता है और इससे सुख-सौभाग्य एवं धन-संतान की प्राप्ति होती है

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