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देखिये देवी सरस्वती जहाँ पहली बार प्रकट हुई थी वह स्थान आज कैसा लगता है

देवी सरस्वती को कौन नहीं जानता। देवी का ज़िक्र सबसे पहले ऋग्वेद में हुआ था। सरस्वती देवी को ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धिमता का प्रतीक माना जाता है। माता के सम्मान में हर वर्ष वसंत पंचमी का त्यौहार भी मनाया जाता है, जो बसंत ऋतू के पांचवे दिन होता है। हिन्दू ही नहीं बल्कि सरस्वती देवी को जैन धर्म और बुद्ध धर्म के कुछ संप्रदाय भी मानते हैं।

जिस स्थान पर सरस्वती देवी पहली दफा प्रकट हुई थी उस स्थान की कुछ चीज़ों को आप देख कर बोल उठेंगे की देवी वहां आज भी निवास करती हैं।

उत्तराखंड में वह जगह है जहाँ देवी प्रकट हुई थी। पुराणों में इस स्थान के बारे में लिखा गया है। इसी स्थान को प्रभु श्री विष्णु का दूसरा निवास या बैकुंठ भी कहा जाता है।

यह स्थान चीन की सीमा के समीप है और खूबसूरत पहाड़ियों के बीचोबीच बसा है। सर्दी के मौसम में तो इसकी सुंदरता और ज़्यादा बढ़ जाती है। उत्तराखंड के इस दिव्य स्थान से ही पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा की थी। यही नहीं, महर्षि वेद व्यास जी ने इसी स्थान पर महाभारत की रचना करी थी। आप इन घटनाओं की झलक आज भी यहाँ देख सकते हैं।

यह पवित्र स्थान माना गांव में है और यह करीब 3 किलोमीटर दूर है बद्रीनाथ से। इस स्थान पर देवी सरस्वती का नदी रूप में उद्गम भी है और यहाँ उनका एक सुन्दर मंदिर भी है। यह इस चीज़ को भी दर्शाता है की गंगा, यमुना और सरस्वती के बीच में हुए विवाद की वजह स्वरुप देवी सरस्वती को नदी के रूप में यहाँ प्रकट होना पड़ा था। श्रीमद्भगवद और विष्णु पुराण में भी इस कथा का ज़िक्र है।

माता का मंदिर

आईये अब आपको दिखाते हैं देवी सरस्वती का वह दिव्य मंदिर जो इस बात का गवाह है|

देवी सरस्वती का मंदिर दिखने में तो छोटा सा है परंतु इसका महत्व बहुत अधिक और बहुत बड़ा है। कहा जाता है की इस मंदिर के दर्शन मात्र से ही देवी सरस्वती के दर्शन का पूण्य प्रपात हो जाता है।

सरस्वती नदी के ठीक ऊपर एक बड़ी से शिला है जिसे भीम शिला भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है की स्वर्ग जाते वक़्त भीम ने इस शिला को उठाकर यहाँ रखा था। आप यह शिला तस्वीर में भी देख सकते हैं।

यहां सरस्वती नदी मे आपको एक और अद्भुत दृश्य देखने को म‌िलेगा। नदी की धारा पर जब सूर्य की रोशनी पड़ती है तो सामने इंद्र धनुष के सातों रंग नजर आते हैं। कहते हैं यह सात सुर हैं जो देवी सरस्वती की वीणा के तारों में बसे हैं।

देवी सरस्वती की आरती

देवी सरस्वती के मंत्र

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