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स्वतंत्रता के लिए प्रेरित करनेवाला महामंत्र ‘वन्दे मातरम्’ और इस का अर्थ

हर देश का एक राष्ट्रीय गीत होता है, उसी तरह हमारे भारत देश का राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम’ है जिसे हमारे देश में बहुत महत्व दिया जाता है । राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम’ बकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया था|

सारे क्रांतिकारी, आंदोलनकर्ता, उपोषणकर्ता आदि द्वारा उच्चारे गए इस महामंत्र से ब्रिटिशों के ह्रदय डर से कांप उठते उठते थे । इस महामंत्र को किसी रणघोषणा जैसा महत्त्व प्राप्त हुआ था । स्वतंत्रता मिलने के बाद २४ जनवरी १९५० में इस गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में संविधान सभा में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्वीकार कर लिया गया ।

वन्दे मातरम् सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यशामलां मातरम् ।

शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।।

वन्दे मातरम् ।

कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले, अबला केन मा एत बले ।

बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। २ ।।

वन्दे मातरम् ।

तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि, तुमि मर्म त्वं हि प्राणा: शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ।। ३ ।।

वन्दे मातरम् ।

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कमला कमलदलविहारिणी वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् नमामि कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम् ।। ४ ।।

वन्दे मातरम् ।

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां धरणीं भरणीं मातरम् ।। ५ ।।

वन्दे मातरम् ।।

वन्दे मातरम् का अर्थ

हे माते, मैं तुम्हें वंदन करता हूं ।

जलसमृध्द तथा धनधान्यसमृध्द दक्षिण के मलय पर्वत के ऊपर से आनेवाली वायुलहरों से शीतल होनेवाली तथा विपुल खेती के कारण श्यामलवर्ण बनी हुई, हे माता !

चमकती चांदनियों के कारण यहांपर रातें उत्साहभरी होती हैं, फूलों से भरे हुए पौधों के कारण यह भूमि वस्त्र परिधान किए समान शोभनीय प्रतित होती है । हे माता, आप निरंतर प्रसन्न रहनेवाली तथा मधुर बोलनेवाली, वरदायिनी, सुखप्रदायिनी हैं !

तीस करोड मुखों से निकल रही भयानक गरजनाएं तथा साठ करोड हाथों में चमकदार तलवारें होते हुए, हे माते आपको अबला कहने का धारिष्ट्य कौन करेगा ? वास्तव में माते, आप में सामर्थ्य हैं । शत्रुसैन्यों के आक्रमणों को मुंह-तोड जवाब देकर हम संतानों का रक्षण करनेवाली हे माता, मैं आपको प्रणाम करता हूं ।

आपसे ही हमारा ज्ञान, चरित्र तथा धर्म है । आपही हमारा हृदय तथा चैतन्य हैं । हमारे प्राणों में भी आप ही हैं । हमारी कलाईयोंमें (मुठ्ठी में) शक्ति तथा अंत:करण में काली माता भी आपही हैं । मंदिरों में हम जिन मूर्तियों की प्रतिष्ठापना करते हैं, वे सभी आप के ही रूप हैं ।

अपने दस हाथों में दस शस्त्र धारण करनेवाली शत्रुसंहारिणी दुर्गा भी आप तथा कमलपुष्पों से भरे सरोवर में विहार करनेवाली कमलकोमल लक्ष्मी भी आपही हैं । विद्यादायिनी सरस्वती भी आप ही हैं । आपको हमारा प्रणाम है । माते, मैं आपको वंदन करता हूं । ऐश्वर्यदायिनी, पुण्यप्रद तथा पावन, पवित्र जलप्रवाहों से तथा अमृतमय फलों से समृद्ध माता आपकी महानता अतुलनीय है, उसे कोई सीमा ही नहीं हैं । हे माते, हे जननी हमारा तुम्हें प्रणाम है ।

माते, आपका वर्ण श्यामल है । आपका चरित्र पावन है । आपका मुख सुंदर हंसी से विलसीत है । सर्वाभरणभूषित होने के कारण आप कितनी सुंदर लगती हैं ! सच में, हमें धारण करनेवाली तथा हमें संभालनेवाली भी आपही हैं । हे माते, हमारा आपके चरणों में पुन:श्च प्रणिपात ।

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