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बुधवार व्रत करने की विधि, कथा, उद्देश्य एवं फल

बुध ग्रह का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। जिन लोगों की कुंडली में बुध नीचे बैठा है उन्‍हें बुध ग्रह के कुप्रभाव से बचने के लिए बुधवार का व्रत अवश्‍य रखना चाहिए। बुध ग्रह व्यक्ति को विद्वता, वाद-विवाद की क्षमता प्रदान करता है। यह जातक के दांतों, गर्दन, कंधे व त्वचा पर अपना प्रभाव डालता है। यदि यह हमारी कुंडली में नीचे बैठा है तो हमे इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए बुधवार का व्रत अवश्‍य रखना चाहिए।

बुधवार के व्रत से जुड़ी कथा के विषय में हम में से काफी लोग नही जानते हैं। तो आइए आज हम जानते इस कथा के बारे में-

एक समय की बात है। समतापुर नाम का एक नगर था। उस नगर में मधुसूदन नाम का एक बहुत धनवान व्यक्ति रहता था। मधुसूदन का विवाह एक सुंदर और गुणवंती लड़की संगीता से हुआ था। संगीता बलरामपुर नगर की रहने वाली थी।

एक बार मधुसूदन अपनी पत्नी को लेने बुधवार के दिन अपने ससुराल गया। परन्तु संगीता के माता पिता ने बुधवार के दिन अपनी बेटी को विदा करने से मना कर दिया। उनके अनुसार बुधवार के दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए यात्रा नही करनी चाहिए। पर मधुसूदन ने उनकी बात नही मानी और अपनी पत्नी को लेकर निकल पड़ा।

समतापुर जाते समय रास्ते में उनकी बैलगाड़ी का पहिया टूट गया। इसलिए उन्हें अपनी आगे की यात्रा पैदल ही शुरू करनी पड़ी। ज्यादा चलने की वजह से रास्ते में संगीता को प्यास लगी। मधुसूदन उसे एक पेड़ के नीचे बैठाकर जल लेने चला गया।

जैसे ही मधुसूदन जल लेकर वापस आया तो वह संगीता के पास बैठे अपने हमशक्ल को देख कर दंग रह गया। संगीता भी मधुसूदन को देखकर हैरान रह गई। वह दोनों में कोई अंतर नहीं कर पाई।

मधुसूदन ने उस व्यक्ति से पूछा- ‘तुम कौन हो और मेरी पत्नी के पास क्यों बैठे हो?’ मधुसूदन की बात सुनकर उस व्यक्ति ने कहा- ‘अरे भाई, यह मेरी पत्नी संगीता है। मैं अपनी पत्नी को ससुराल से विदा करा कर लाया हूँ। लेकिन तुम कौन हो जो मुझसे ऐसा प्रश्न कर रहे हो?’

मधुसूदन और उसके हमशक्ल में झगड़ा शुरू हो गया। यह देखकर कुछ सिपाही उन्हें राजा के दरबार में ले आये। सारी कहानी सुनकर राजा भी कोई निर्णय नहीं कर पाया।

राजा ने दोनों को कारागार में डाल देने का आदेश दिया। यह सुनकर मधुसूदन बहुत डर गया। तभी आकाशवाणी हुई- ‘मधुसूदन! तूने संगीता के माता-पिता की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन अपनी ससुराल से प्रस्थान किया। यह सब भगवान बुधदेव के प्रकोप से हो रहा है।’

मधुसूदन ने भगवान बुधदेव से क्षमा मांगी और कहा कि वह भविष्य में अब कभी बुधवार के दिन यात्रा नहीं करेगा और सदैव बुधवार को बुध देव का व्रत किया करेगा। बुध देव ने मधुसूदन को क्षमा कर दिया और तभी दूसरा व्यक्ति वहां से गायब हो गया। यह देखकर सब हैरान रह गए।

राजा ने मधुसूदन और उसकी पत्नी को सम्मानपूर्वक अपने दरबार से विदा किया। रास्ते में उन्हें अपनी बैलगाड़ी मिली। बैलगाड़ी का टूटा हुआ पहिया भी जुड़ा हुआ था। दोनों उसमें बैठकर समतापुर की ओर चल दिए। मधुसूदन और उसकी पत्नी संगीता दोनों बुधवार को व्रत करते हुए आनंदपूर्वक जीवन-यापन करने लगे। जल्दी ही उनका जीवन खुशियों से भर गया।

बुधवार का व्रत करने से स्त्री-पुरुषों के जीवन में सभी मंगलकामनाएँ पूरी होती हैं|

व्रत रखने का उद्देश्य-

इस व्रत को नियमित रूप में रखने से सर्व सुखों की प्राप्ति होती है।

जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं रहता।

इस व्रत को करने से बुद्धि बढ़ती है।

व्रत रखने की विधि-

बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठ कर घर की सफाई करे। फिर नित्य-क्रम कर स्नान कर लें। व्रत वाले दिन हरा वस्त्र धारण करें। इसके बाद पवित्र जल का घर में छिड़काव करें। घर के ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान बुध या शंकर भगवान की मूर्ति अथवा चित्र किसी कांस्य पात्र में स्थापित करें। तत्पश्चात धूप, बेल-पत्र, अक्षत और घी का दीपक जलाकर पूजा करें।

इसके बाद निम्न मंत्र से बुध की प्रार्थना करें- बुध त्वं बुद्धिजनको बोधदः सर्वदा नृणाम्‌। तत्वावबोधं कुरुषे सोमपुत्र नमो नमः॥

तत्पश्चात बुधवार के व्रत से जुड़ी कथा सुनकर आरती करें। इसके पश्चात गुड़, भात और दही का प्रसाद बाँटकर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

बुधवार व्रत वाले दिन भगवान को सफ़ेद फूल व हरे रंग की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए। यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दान दें। जिन्होंने व्रत रखा है उन्हें एक समय ही भोजन करना चाहिए।

व्रत कथा को बीच में छोड़कर तथा प्रसाद ग्रहण किये बिना कहीं ना जाये।

आरती-

आरती युगलकिशोर की कीजै |
तन मन धन न्योछावर कीजै || टेक ||

गौरश्याम मुख निरखत रीजे |
हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै ||

रवि शशि कोटि बदन की शोभा |
ताहि निरखि मेरो मन लोभा ||

ओडे नील पीत पट सारी |
कुंजबिहारी गिरिवरधारी ||

फूलन की सेज फूलन की माला |
रतन सिहांसन बैठे नंदलाला ||

कंचनथार कपूर की बाती |
हरि आये निर्मल भई छाती ||

श्री पुरषोतम गिरिवरधारी |
आरती करें सकल ब्रज नारी ||

नंदनंदन ब्रजभान, किशोरी |
परमानंद स्वामी अविचल जोरी ||

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