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रावण के जीवन के कुछ अद्भुद रहस्य - सावधान! कहीं आप सहम ना जाएँ

रावण लंका का राजा था। अपने दस सिरों के कारण वह दशानन के नाम से भी जाना जाता था। वह एक कुशल राजनीतिज्ञ, महापराक्रमी, अत्यन्त बलशाली, अनेकों शास्त्रों का ज्ञाता प्रकान्ड विद्वान पंडित एवं महाज्ञानी था। रावण रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक था। रावण के जीवन के कुछ रहस्यों से हम में से ज्यादातर लोग अनजान हैं। आइए जानते हैं रावण के कुछ अनसुने रहस्य-

पिता ऋषि तथा माता राक्षसी- रावण के पिता एक ऋषि थे जबकि उसकी माता एक राक्षसी थी। रावण के जन्म के समय रावण बहुत भयानक था। जब रावण के पिता ने पहली बार रावण को देखा तो वह उसे देखकर भयभीत हो गए।

रथ में अश्व नही गधे थे- बाल्मिकी रामायण में उल्लेख आया है कि रावण के रथ में अश्व नही बल्कि गधे जुते रहते थे।

यमलोक पर अधिकार- रावण को ब्रह्मा जी से वरदान मिला हुआ था। उसी वरदान के कारण रावण ने देवलोक पर विजय प्राप्त की तथा देवलोक पर विजय प्राप्त करने के बाद रावण ने यमराज को पराजित कर यमलोक पर अधिकार कर लिया और नरक भोग रही आत्मायों को अपनी सेना में शामिल कर लिया।

रावण के भाई थे कुबेर- देवतायों के खजांची भगवान कुबेर रावण के सौतेले भाई थे। रावण ने कुबेर को लंका से निकाल कर स्वयं लंका पर अधिकार कर लिया था। रावण के पास जो पुष्पक विमान था वह भी कुबेर का ही था।

शनि महाराज को बनाया था बंदी- रावण ज्योतिष का बहुत बड़ा विद्वान था। अपने पुत्र मेघनाद को वह अजय बनाना चाहता था। इसलिए उसने नवग्रहों को आदेश द‌िया कि वह उसके पुत्र की कुंडली में सही तरह से बैठें। परन्तु शनि महाराज ने यह बात नही मानी। इसलिए रावण ने उन्हें बंदी बना लिया।

अशोक वाटिका में थे दिव्य पुष्प- रावण के अशोक वाट‌िका में एक लाख से अध‌िक अशोक के पेड़ के साथ-साथ द‌िव्य पुष्प और फलों के वृक्ष थे। यहीं से हनुमान जी आम लेकर भारत आए थे।

रंभा से मिला था श्राप- रावण क‌िसी स्‍त्री से उसकी मर्जी के ब‌िना संबंध नहीं बना सकता, अगर उसने ऐसा करने की कोशिश की तो उसके स‌िर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे और उसकी मृत्यु हो जाएगी। यह श्राप रावण को रंभा नाम की अप्सरा ने दिया था।

नाभि में था अमृत- रावण की नाभ‌ि में अमृत होने के कारण रावण का एक स‌िर कटने के बाद पुनः दूसरा स‌िर आ जाता था और वह जीव‌ित हो जाता था।

सभी देवता तथा दिग्पाल रावण के दरबार में हाथ जोड़ कर खड़े रहते थे। हनुमान जी जब लंका पहुंचे तो इन्हें रावण के बंधन से मुक्त करवाया।

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