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मिथुन राशि वाले लोगों के बारे में क्या ये बातें आप जानते हैं?

आज हम बताने जा रहे हैं तीसरी राशि मिथुन के बारे में मिथुन राशि का प्रतिक है आलिंगनबद्ध स्त्री और पुरुष की छवि साथ ही मिथुन के राशि स्वामी बुद्ध हैं| मिथुन राशि के जातकों के नाम क्रमशः का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह अक्षरों से शुरू होते हैं और मृगसिरा नक्षत्र के तीसरे चरण के मालिक मंगल एवं शुक्र हैं।

मंगल शक्ति का प्रतिक है और शुक्र को माया का प्रतिक माना गया है| इस राशि के जातकों के अन्दर माया यानि के मुद्रा, गहने इत्यादि के प्रति भावना पाई जाती है, एवं इस राशि के जातक दाम्पत्य जीवन में हमेशा शक्ति बन कर प्रस्तुत होते है। ज्यादातर घरेलू कारणों के चलते कई बार आपस में मतभेद और तनाव बना रहता है।

मंगल और शुक्र के साथ साथ होने की वजह से इस राशि वालों में स्त्रियों को रोग को परख लेने की अद्भुत क्षमता होती है| इस राशि के लोग मंगल की वजह से अपने वचनों के पक्के होते हैं और साथ ही जिज्ञासु और खोजी दिमाग होने के कारण इस राशि के लोग अन्वेषण में भी सफल होते हैं और पत्रकार, लेखक, मीडियाकर्मी, भाषाओं के जानकार या फिर योजनाकार भी बन सकते हैं। इस राशि के जातकों का झुकाव घरेलू साज-सज्जा के प्रति अधिक होता है|

जातक को वाहनों की अच्छी जानकारी होती है और इसी वजह से नए-नए वाहनों और सुख के साधनों के प्रति अत्यधिक आकर्षित होते है। इनके कुंडली में गुरु और राहू के आस पास होने की वजह से ये ईश्वरीय ताकत के भी स्वामी होते हैं जैसे की इस राशि के जातकों में ब्रम्हाण्ड के बारे में जानने की शक्ति जन्मजात होती है और इसकी वजह से अगर ये वायुयान या सैटेलाईट के निर्माण के क्षेत्र में जाते हैं तो सफलता उनके कदम चूमती है|

इतना ही नहीं जातक के अन्दर शिक्षा और शक्ति उत्पादित होती है और इसका कारण राहु-शनि का साथ मिलना है। जातक का कार्यक्षेत्र शिक्षा स्थानों में या बिजली, पेट्रोल या वाहन वाले कामों की ओर होता है। मिथुन राशि वालों के अंदर एक मर्यादा होती है जो उसे धर्म में लीन करती है और जातक का रुझान धार्मिक और सामाजिक कार्यों में होने की वजह से ये हमेशा ही इन कार्यों में तल्लीन रहते हैं| गुरु को ज्ञान का मालिक माना जाता है और अगर मंगल बुद्ध साथ मिल जाए तो व्यक्ति उच्च पद प्राप्त करता है और ज्यादातर रक्षा आदि विभागों की ओर अग्रसर होता है।

इस राशि के लोग अपने विचारों में ही खोये रहते हैं बुद्ध के राशि स्वामी होने की वजह से जातक का स्वभाव पारे की तरह होता है जरा सी बात पर गुस्सा होना और जल्द ही गुस्सा शांत हो जाना भी इनके एक अदा है| मिथुन राशि वाले दूसरे की मन की बातें पढऩे, दूरदृष्टि, बहुमुखी प्रतिभा, अधिक चतुराई से कार्य करने वाले होते हैं| बुद्धिमता और मीठी वाणी होने कि वजह से ये कुशल राजनीतिज्ञ या प्रवक्ता भी बन सकते हैं| इस राशि का स्वामी बुद्ध है और इसी वजह से बुद्धवार इनके लिए भाग्यशाली होता है साथ ही सुभ रंग संतरा, नींबू, पीला शुभ रत्न पुखराज, पन्ना शुभ अंक 5, 14, 23, 32, 41, 50 होता हैं|

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