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इन 14 वस्तुओं को कभी न बेचें अन्यथा परिणाम बुरा हो सकता है!

हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे पौराणिक धर्म है और इस धर्म में अनेक ग्रंथ मौजूद हैं। इन ग्रंथों में भाँति भाँति प्रकार की उपयोगी बातें बताई गयी हैं जिनके इस्तेमाल करने से मनुष्य जीवन और बेहतर किया जा सकता है। अगर हम विष्णु पुराण की बात करें तो इस ग्रंथ में श्री विष्णु और उनके सभी अवतारों के बारे में विस्तार से लिखा है| साथ ही उसमे कई ऐसी बातें भी बताई गयी है जिनका अनुसरण करने से मनुष्य सभी कष्ट से पुक्ति पा कर बैकुंठ लोक में परम पद प्राप्त कर सकता है|

विष्णु पुराण स्वयं भगवान् विष्णु ने अपनी अर्धांगिनी देवी लक्ष्मी और देवऋषि नारद को सुनाई थी| विष्णु पुराण की रचना महर्षि वेदव्यास द्वारा की गयी थी उनके अनुसार दुसरे का भला सोचने और करने वाला साथ ही स्वार्थ से दूर रहने वाला मनुष्य ही कलयुग में सफलता प्राप्त कर सकता है| साथ ही विष्णु पुराण के अनुसार कुछ ऐसे वस्तुएं हैं जिन्हें किसी भी हाल में बेचना नहीं चाहिए भले ही कितनी भी बड़ी विपत्ति क्यों न आ जाए इस वस्तुओं को बेचना पाप माना जाता है|

फल और सब्जी प्रकृति द्वारा भूखे लोगों की भूख मिटाने के लिए बनाई गयी थी और जैसे माँ अपने बच्चे की भूख मिटाती है वैसे ही फलों और सब्जियों को भी माता का दर्ज़ा दिया जाता है और माता का विक्रय पाप की श्रेणी में आता है|

किसी मजबूर और असहाय व्यक्ति की मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी बिमारी के वक़्त उसे दवाइयां बेचना भी घोर अपराध है और इसे अक्षम्य पाप माना जाता है|

किसी भी जीव की हत्या पाप तो है ही साथ ही अगर कोई जीवित प्राणी की हत्या करता है और मांस बेचता है तो उससे बड़ा पापी कोई नहीं होता|

जैसा की हम सभी जानते हैं की दही का उपयोग हर पूजा में अनिवार्य है और इसका व्यापार करने से भगवान् विष्णु रुष्ट होते हैं|

साथ ही बना बनाया भोजन बेचना भी पाप माना जाता है किसी भूखे मनुष्य को भोजन कराना पुण्य का काम है परन्तु अगर कोई पैसे लेकर भोजन कराता है तो वो पुण्य नहीं बल्कि पाप होता है|

गाय के दूध का व्यापार भी पाप माना गया है क्योंकि हिन्दू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और विष्णु पुराण के अनुसार माता का दूध बेचना निषेध है|

अगर कोई पूजा के लिए लाल वस्त्र बेचता है तो वो मान्य है परन्तु अगर गलती से भी सफ़ेद वस्त्र को पूजा में इस्तेमाल के लिए बेचा जाए तो वो पाप होता है| सफ़ेद वस्त्र मृत्यु का प्रतिक है वहीँ लाल रंग खुशहाली और समृद्धि का सूचक है|

सरसों के तेल का व्यापार भी मना है और इसका व्यापार करने वाले को यमलोक में भयंकर प्रताड़ना भोगनी पड़ती है|

शास्त्रों के अनुसार धृत (घी ) घर पर ही बनाना चाहिए और घी का क्रय विक्रय यानि की खरीदना और बेचना भी मना है और इसे जघन्य पाप माना गया है|

विष्णु पुराण में लिखा है की गुड बेचने से भी जीवन की मिठास ख़त्म हो जाती है|

साथ ही सफ़ेद तिल बेचना भी मना है सफ़ेद तिल बेचने से घर में दरिद्रता आती है|

नमक बेचना भी अपराध माना जाता है परन्तु नमक दान करने को सबसे उत्तम दान माना गया है|

हमारे हिन्दू धर्म के अनुसार मधु जैसी कुछ वस्तुएं ऐसी भी हैं जिन्हें सिर्फ भगवान् को ही अर्पित करने के लिए बनाया गया है इन्हें ग्रहण करना या बेचना सर्वथा वर्जित है|

 

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