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हनुमान जी महाराज बनकर करते है भक्तों के दुख दूर

हनुमान जी की महिमा निराली है|भक्तों को मार्गदर्शन दिखाने वाले श्री राम जी के प्यारे हनुमान जी ने रामायण में मुख्य भूमिका निभाई है| महराभरात में भी हनुमान जी को दर्शाया गया है और उन्हें चिरंजीवी कहा गया है|

सारंगपुर मंदिर

हनुमान जी का मंदिर सारंगपुर, गुजरात में स्थित है जो की वोटाड जंक्शन से करीब 12 मील दूर है| यहाँ हनुमान जी महाराजा बनकर अपने भक्तों के दुख दूर करते है और अपने श्रद्धालुओं को सुख प्रदान करते है| वैसे यह मंदिर स्वामी नारायण जी का है परन्तु इसमें उनकी कोई मूर्ति स्थापित नही है| कष्टभंजन हनुमान के नाम से सारंगपुर मंदिर प्रसिद्ध है|

प्रतिमा स्थापना

गोपालनंद स्वामी, नारायण जी के भक्त ने 1905 विक्रम सवंत में कष्टभंजन हनुमान मंदिर का निर्माण किया| जिसकी नीव आश्विन कृष्ण पक्ष की पंचमी में पड़ी| इस मंदिर में उन्होंने बजरंगबली की बलशाली और आकर्षित स्वरुप की मूर्ति स्थापित की|

मंदिर का निर्माण

करीब 200 वर्ष पूर्व स्वामी नारायण जी मंदिर के स्थल पर बजरंगबली की भक्ति में लीन थे कि तभी उन्हें हनुमान जी के दिव्य और अदभुद रूप के दर्शन हुए| इसी कारण हनुमान मंदिर का निर्माण किया गया|

आरती का विधान

इस मंदिर में प्रातः 5:30 बजे बजरंगबली की आरती की जाती है| श्रद्धालु दूर दूर जगहों से आते है और हनुमान जी की आरती और भक्ति में लीन हो जाते है| मंगलवार और शनिवार को लाखो की संख्या में लोग आते है और नारियल, पुष्प और मिठाई का प्रसाद हनुमान जी को भेंट कर अपने खुशमय जीवन की प्राथना करते है|

क्या है इस धाम की विशेषता

कुछ जानकारों से पता चला की प्राचीन काल में भक्तोंं पर शनि का प्रकोप था| शनि के प्रकोप से परेशान होकर भक्तों ने बजरंगबली को अपनी फरियाद सुनाई और उनकी बातें सुन बजरंगबली क्रोध में आकर शनि को मारने की योजना बनाने लगे और शनि के मारने के लिए पीछे पड़ गए। हनुमान जी का बाल ब्रह्मचारी होने का लाभ उठाते हुए शनिदेव ने स्त्री का रूप धारण कर लिया। इसी वजह से पवनपुत्र हनुमान ने शनिदेव को मारने से इंकार कर दिया क्योंकि वे स्त्री पर हाथ नही उठा सकते। लेकिन श्री राम जी का आदेश मानते हुए उन्होंने स्त्री रूपक शनिदेव को अपने पैरों तले कुचल दिया।

तब से माना जाता है कि इस मंदिर में हनुमान जी की पूजा करने से शनि का प्रकोप दूर हो जाता है। बजरंगबली के चरणों में शनि की स्त्री स्वरूप मूर्ति विराजमान है और भक्तो को दर्शन प्रदान करती है जिससे उनके ऊपर से शनि के प्रकोपों का निवारण होता है। यहाँ पर भक्तों का विशवास है कि यहाँ 33 देवी देवताओं की शक्ति एकत्रित है और हनुमान जी के साथ साथ शनि जी का आशीर्वाद भी मिलता है। शनिदेव से मुक्ति तो मिलती ही है साथ में संकतमोचम का रक्षा कवच भी मिलता है।

विशेष पुजारी

मंदिर प्रशासन ने शनिवार को होने वाली प्रक्रिया के लिए एक विशेष ब्राह्मण पुजारी को बुलाया जो की भक्तों के दुख निवारण के लिए उन्हें परिकर्मा करवाते थे और स्वामी नारायण का जाप जपवाते थे और साथ ही साथ मंदिर का ध्यान रखते थे| 1899 में शास्री यांगपुरुष को मंदिर की देखरेख के लिए नियुक्त किया उन्होंने मंदिर के विकास में अपना अधिक योगदान दिया|

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