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एक ऐसा मंदिर जहाँ भगवान की नहीं बल्कि कुत्ते की पूजा की जाती है

हिन्दू धर्म के लोग लाखों मंदिरों में जाकर अपना सर झुका कर भगवान से आशीर्वाद लेते है और मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्राथना करते है| परन्तु आप कभी ऐसे मंदिर में गए हो जहाँ भगवान की मूर्ति की पूजा नहीं की जाती| एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ भगवान की नहीं अपितु कुत्ते की पूजा की जाती है| मंदिर में भगवान की मूर्ति के साथ साथ एक कुत्ते की प्रतिमा स्थापित है| यहां आने वाले लोगों की मान्यता है की इस मंदिर में आकर कुकुरदेव का पूजन करने वाला मनुष्य कुकुरखांसी तथा कुत्ते के काटने से होने वाले विभिन्न रोगों से सुरक्षित रहता है|

मंदिर का निर्माण

यह मंदिर छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव में है और इसका नाम ‘कुकुरदेव’ मंदिर है| दरअसल यह मंदिर भैरव का स्मृति चिन्ह है, जो भगवान शिव को समर्पित है| इस मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग भी है| मंदिर की दीवारों पर नागों जैसी आकृति बनी हुई है| मंदिर के आंगन में शिलालेख है, जिस पर बंजारों की बस्ती, चांद-सूरज और तारों की आकृति बनी हुई है| यहां राम लक्ष्मण और शत्रुघ्न की मूर्ति भी है और मंदिर के आंगन में कुत्ते की प्रतिमा| इसके अलावा एक पत्थर से बनी दो फीट की गणेश प्रतिमा भी मंदिर में स्थापित है| इस मंदिर का निर्माण 14वीं-15वीं शताब्दी फणी नागवंशी शासकों द्वारा कराया गया था|

कुकुरदेव मंदिर से जुड़ी दिलचस्प कहानी

मान्यता के मुताबिक, कभी यहां बंजारों की बस्ती हुआ करती थी| मालीघोरी नाम के बंजारे के पास एक पालतू कुत्ता था| बंजारे को अकाल पड़ने के कारण अपने प्रिय कुत्ते को जमींदार के पास गिरवी रखना पड़ा| इसी बीच, जमींदार के घर चोरी हो गई, कुत्ते ने चोरों को चोरी किया हुआ सामान पास ही के एक के तालाब में छिपाते हुए देख लिया था| सुबह कुत्ता जमींदार को उस जगह पर ले गया और उसे चोरी का सामान भी मिल गया|

कुत्ते की वफादारी देख जमींदार बहुत प्रसन्न हुआ और उसने परिस्तिथि को विस्तार में एक कागज़ में लिखकर उसके गले में बांध दिया और असली मालिक के पास जाने के लिए कुत्ते को मुक्त कर दिया| बंजारे ने अपने कुत्ते को लौटता आया देख डंडे से पीट-पीटकर मार डाला| फिर कुत्ते के गले में बंधी चिट्ठी पढ़कर बंजारे को अपनी गलती का अहसास हुआ| प्रायश्चित के तौर पर उसने अपने प्रिय स्वामी भक्त कुत्ते की समाधि मंदिर में आंगन में बनवाई| बाद में किसी ने कुत्ते की मूर्ति भी लगवा दी| आज भी यह स्थान कुकुरदेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है|

मालीधोरी बंजारा के नाम से मंदिर के सामने की सड़क के पार से मालीधोरी गांव शुरू होता है|

मंदिर के मुख्यद्वार पर कुकुरदेव लिखा हुआ है जिसको देख लोग खींचे चले आते है| मान्यता है की जिस व्यक्ति को किसी कुत्ते ने काटा हो वह यहाँ आने से ठीक हो जाते है बिना इलाज कराएं| यहाँ दर्शन करने से कुकुर खांसी व कुत्ते के काटने का कोई भय नहीं रहता है|

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