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श्रवण कुमार अपने माता पिता की सेवा के लिए क्यों जाने जाते हैं?

श्रवण कुमार अपने माता – पिता की सेवा के लिए जाने जाते हैं| वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड के 64वें अध्याय में श्रवण कुमार की कथा मिलती है| श्रवण कुमार के माता – पिता अंधे थे|

इस कथा के अनुसार श्रवण कुमार की पत्नी उनके माता – पिता को पसंद नहीं करती थी और न ही वह उनकी सेवा कर के खुश थी| वह केवल अपने पति के सामने उनकी सेवा का झूठा नाटक किया करती थी| जैसे ही श्रवण कुमार घर से बाहर जाते थे उनकी पत्नी अपने सास – ससुर को बहुत तंग किया करती थी|

एक बार श्रवण कुमार को अपनी पत्नी के इस व्यवहार के बारे में पता चल गया तो उन्होंने अपनी पत्नी को इस बात के लिए बहुत डांटा| अपने पति के इस व्यवहार को देखकर श्रवण कुमार की पत्नी उनसे रुष्ट होकर मायके चली गयी|

अपनी पत्नी के जाने के बाद श्रवण कुमार ने अपने माता पिता से अपनी पत्नी की तरफ से माफी मांगी और उनसे पूछने लगे कि अगर आपके जीवन की कोई अधूरी इच्छा है तो मुझे बताइए, मैं उसे पूरा करने की कोशिश करूँगा|

अपने पुत्र की यह बात सुनकर बूढ़े माता – पिता की आँखों में आंसू आ गए| उन्होंने अपने पुत्र से कहा कि हमें तीर्थस्थलों की यात्रा करने की इच्छा थी| परन्तु बिना आँखों के यह इच्छा पूरी नहीं हो सकती है|

यह बात सुनकर श्रवण कुमार ने अपने माता – पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने की ठान ली| इसके लिए श्रवण कुमार ने दो बड़ी – बड़ी टोकरियां ली और उन्हें एक मजबूत लाठी के दोनों सिरों पर रस्सी से बांधकर लटका दिया| इस तरह उन्होंने एक बड़ा कांवड़ा बना कर उसमें अपने माता – पिता को बैठाया और उन्हें तीर्थ यात्रा के लिए ले गए|

श्रवण कुमार ने इसी तरह कांवड़ा अपने कन्धों पर उठा कर अपने माता – पिता को सभी तीर्थ स्थलों की यात्रा करवाई| यात्रा के दौरान श्रवण कुमार अपने माता – पिता को लेकर अयोध्या पहुंचे| जब यह अयोध्या के वन से गुजर रहे थे तो श्रवण कुमार के बूढ़े माता – पिता को बहुत प्यास लगी| उन्होंने अपने पुत्र को पानी लाने के लिए कहा| अपने माता – पिता के लिए श्रवण कुमार वन में पानी ढूंढने लगे| तभी एक जगह उन्हें जल का स्त्रोत दिखाई दिया और वह उस स्त्रोत के समीप जाकर पानी भरने लगे|

इसी दौरान अयोध्या के राजा दशरथ वहीं से गुजर रहे थे| वह उस समय शिकार पर निकले हुए थे| जल के स्त्रोत के पास राजा दशरथ को कुछ आवाज सुनाई दी तो उन्हें लगा कि वहां कोई जानवर है| यही सोचकर उन्होंने अपना शब्दभेदी बाण चला दिया| श्रवण कुमार राजा दशरथ द्वारा चलाये गए इस बाण का शिकार हो गए| जिस कारण उनकी मृत्यु हो गयी|

राजा दशरथ को अपनी भूल पर बहुत पछतावा हुआ| उधर राजा दशरथ द्वारा अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार सुनकर श्रवण कुमार के माता – पिता ने राजा दशरथ को श्राप दिया कि वह भी अपने पुत्र के वियोग में तड़पेंगें और मृत्यु को प्राप्त होंगें| श्राप देने के बाद बूढ़े माता – पिता ने भी अपने प्राण त्याग दिए|

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