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श्रीरामचरितमानस के अनुसार इन चीजों को छोटा समझना हो सकता है नुकसानदेह

श्रीरामचरितमानस में एक प्रसंग का उल्लेख है जिसमें शूर्पणखा अपना नाक व कान कट जाने के बाद अपने भाई रावण के पास जाती है| रावण क्रोध में आकर लक्ष्मण से बदला लेने की बात करता है| तब शूर्पणखा रावण को बताती है कि इन 6 चीजों को कभी कमजोर या छोटा नहीं समझना चाहिए|

सोरठा

रिपु रुज पावक पाप प्रभु अहि गनिअ न छोट करि।
अस कहि बिबिध बिलाप करि लागी रोदन करन।।

अर्थात- शत्रु, रोग, अग्नि, पाप, स्वामी और सर्प को छोटा नहीं समझना चाहिए। ऐसा कहकर शूर्पणखा अनेक प्रकार से विलाप करके रोने लगी।

शत्रु

शूर्पणखा रावण को समझाती है कि हमें अपने दुश्मन को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए| हमारा शत्रु चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, हमें हमेशा उनसे सावधान रहना चाहिए| कभी कभी छोटे शत्रु भी हमारा बड़ा नुकसान कर सकते हैं| हम सोचते हैं कि हम अपने छोटे शत्रुयों से कभी हार नहीं सकते| परन्तु यदि हमारे छोटे – छोटे शत्रु मिलकर हम पर हमला कर दें तो हमें हरा सकते हैं|

रोग

अक्सर हम अपनी छोटी – छोटी बीमारियों को नजरअंदाज कर देते हैं| परन्तु यही छोटी बीमारियां हमारे शरीर को अंदर से खत्म कर देती हैं| कभी – कभी साधारण लगने वाली खांसी भी टीबी का रूप धारण कर लेती है| इस तरह छोटी – छोटी बीमारियां या रोग हमारी मृत्यु का कारण बन सकते हैं|

अग्नि

आग का सबसे छोटा रूप एक चिंगारी होती है, परन्तु यही छोटी सी चिंगारी पुरे वन को जला कर राख कर सकती है| आग के विकराल रूप पर नियंत्रण पाना किसी के बस में नहीं होता| इसलिए आग के साथ कभी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए| यह कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है|

पाप

शास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मो के हिसाब से फल मिलता है| कई बार व्यक्ति ऐसे छोटे – छोटे गलत कार्य कर देता है जिससे वह पाप का भागीदार बन जाता है| जब इन छोटे-छोटे पाप कर्मों का फल एकत्रित हो जाता है तो इसकी भयानक सजा मिलती है| इसलिए पाप कर्म भले ही छोटा है, लेकिन करने से बचना चाहिए|

स्वामी यानी मालिक

अपने मालिक को कभी नाराज करने की गलती नहीं करनी चाहिए| यदि आप अपने मालिक को छोटा समझते हैं तो आप बहुत गलत हैं| क्योंकि अगर मालिक नाराज हो जाए तो वह आपका बड़ा नुकसान कर सकता है|

सांप

सांप दिखने में चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो| परन्तु यदि वह काट ले तो उसके विष से मृत्यु हो सकती है| कई बार सांप पकड़ने वाले ही सांप का शिकार बन जाते हैं| क्योंकि उन्हें यही लगता है कि हमेशा की तरह वे सांप को अपने वश में कर लेंगे| उनकी यही सोच कई बार उनकी जान की दुश्मन बन जाती है| इसलिए सांप को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए|

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