विवाह की रस्मों में पीछे होते हैं कुछ वैज्ञानिक कारण

हिन्दू धर्म में विवाह के समय अनेक रस्में होती हैं| जैसे मेहँदी लगाना, हल्दी लगाना, मांग में सिंदूर भरना आदि| क्या आप जानते हैं कि इन रस्मों के पीछे वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं| आइए जानते हैं इन रस्मों से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में|

मेहंदी लगाना 

मेहंदी में शरीर को शीतलता देने के गुण होते हैं| विवाह के समय लगाई जाने वाली मेहंदी से वधु को तनाव, सिरदर्द और बुखार से राहत मिलती है| मेहंदी नाखूनों की वृद्धि में भी सहायक होती है| मेहंदी कई प्रकार के वायरल इन्फेक्शन से भी शरीर की रक्षा करती है|

हल्दी लगाना 

हल्दी को एक चमत्कारी जड़ी बूटी कहा जाता है| इसमें औषधीय गुण होते हैं| यह चेहरे पर निखार लाने के साथ – साथ त्वचा में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देती है|

चूड़ियां पहनना 

हमारी कलाई में बहुत सारे एक्युप्रेशर पॉइंट्स होते हैं| चूड़ियां पहनने से इन पॉइंट्स पर दबाव पड़ता है| जिससे रक्त संचार ठीक तरह से होता है जो आपको स्वस्थ रखने में सहायता करता है|

मांग में सिंदूर भरना

सिंदूर में पारा नामक धातु होता है| पारे की प्रकृति शीतल होती है| इसलिए यह शरीर को ठंडा रखने में सहायक होता है| जिससे तनाव कम होता है|

बिछुए पहनना 

हिन्दू धर्म में विवाह के समय दुल्हन के पैरों में बिछुए पहनाये जाते हैं| इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण होते हैं| पैर की दूसरी उंगली में एक विशेष नस होती है जो गर्भाशय से गुजरती हुई हृदय तक जाती है| बिछुए पहनने से गर्भाशय मजबूत होता है|

पवित्र अग्नि 

विवाह के समय वर और वधु को अग्नि के चारों ओर फेरे लेने होते हैं| अग्नि के चारों ओर फेरे लेने का भी विशेष महत्व है| अग्नि आस पास के वातावरण को शुद्ध करती है| अग्नि से नाकारत्मक ऊर्जा दूर भागती है और साकारत्मक ऊर्जा फैलती है| अग्नि में विभिन्न प्रकार की लकड़ियां, घी, चावल तथा अन्य वस्तुएं इसमें डाली जाती हैं जिससे यह अग्नि शक्तिशाली शुद्धिकारक बन जाती है|

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