करवा चौथ : पूजा विधि और व्रत कथा

Karwa Chauth

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है। कई संप्रदायों में कुवांरी कन्याएं भी अच्छे पति की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं। यहां जानें, कैसे करें यह व्रत और क्या है इस व्रत की पौराणिक कथा…

व्रत विधि
करवा चौथ का व्रत निर्जला व्रत होता है यानी पूरे दिन न कुछ खाते हैं और न ही पानी पीते हैं। शाम के समय भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा होती है। साथ ही करवा माता का पूजन किया जाता है। शाम को चांद देखकर अर्घ्य देते हैं और पति के हाथों से पानी पीकर व्रत खोलते हैं।

शगुन
इस दिन सुहाग की सभी चीजें घर की बड़ी महिलाओं को पूजा के बाद देते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

भोजन
इस दिन भोजन में पूड़ी-सब्जी, खीर, फल और मिठाई से भगवान को भोग लगाकर पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। बाद में इस भोजन को सास या घर की किसी बड़ी महिला को देते हैं। ऐसा संभव न हो सके तो इस भोजन को मंदिर में दे देना चाहिए।

क्या न करें
– आज के दिन पूरी तरह संतुष्ट और खुश रहें।
– किसी पर क्रोध न करें।
– किसी का दिल न दुखाएं। बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
– सफेद चीजें दान में न दें।
– नुकीली और काटने वाली चीजें जैसे, कैंची, चाकू आदि के प्रयोग से बचें।

कथा
एक समय की बात है, करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी किनारे बसे गांव में रहती थीं। एक दिन इनके पति नदी में स्नान करने गए। स्नान करते समय नदी में एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया गहरे पानी में ले जाने लगा। मृत्यु को करीब देखकर करवा माता के पति ने करवा को नाम लेकर पुकारना शुरू किया।

पति की आवाज सुनकर करवा माता नदी तट पर पहुंची और पति को मृत्यु के मुख में देखकर क्रोधित हो गईं। करवा माता ने एक कच्चे धागे से मगरमच्छ को बांध दिया और कहा कि अगर मेरा पतिव्रत धर्म सच्चा है तो मगरमच्छ मेरे पति को लेकर गहरे जल में नहीं ले जा सके। इसके बाद यमराज वहां उपस्थित हुए। उन्होंने करवा से कहा कि तुम मगरमच्छ को मुक्त कर दो। इस पर करवा ने कहा कि मगरमच्छ ने मेरे पति को मारने का प्रयत्न किया है इसलिए इसे मृत्युदंड दीजिए और मेरे पति की रक्षा कीजिए।

तब यमराज ने कहा कि अभी मगरमच्छ की आयु शेष है, अत: मैं उसे नहीं मार सकता। इस पर करवा ने यमराज से अपने पति के प्राण न हरने की विनय करते हुए कहा कि मैं अपने सतीत्व के बल पर आपको अपने पति के प्राण नहीं ले जाने दूंगी, आपको मेरी विनय सुननी ही होगी। इस पर यमराज ने कहा कि तुम पतिव्रता स्त्री हो और मैं तुम्हारे सतीत्व से प्रभावित हूं। ऐसा कहकर यमराज ने मगरमच्छ के प्राण ले लिए और करवा के पति को दीर्घायु का वरदान मिला।

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