एक हिन्दू गोरखा सैनिक ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 3 ISIS लड़ाकों को पारंपरिक खुखरी से मार डाला

एक स्पेशल एयर सर्विस के हिन्दू सिपाही ने अपनी जान पर खेलते हुए ३ आई एस आई एस लड़ाकों को पारंपरिक चाकू जिसे खुखरी भी कहा जाता है के सहारे उस समय मार गिराया जब तीनों मिल कर उस बहादुर सैनिक का फैजुल्लाह नामक स्थान पर अपहरण करना चाह रहे थे|

एस ए एस हमेशा से ही आई एस आई एस के खिलाफ लीबिया और इराक में जंग लड़ रहा है और बर्बर हमलों के लिए भी मशहूर है|एस ए एस  के सैनिक लंबे समय से ऊँचे ओहदे के जिहादियों और आतंकी संगठनों के लिए काल हैं साथ ही अन्य कोई भी फ़ौज अगर आई एस आई एस के खिलाफ जंग लड़ रही है तो ये उनकी भी मदद करते हैं|

रिपोर्ट के अनुसार एस ए एस  के स्नाइपर दस्ते को खबर मिली थी की आई एस आई एस के दो आत्मघाती हमलावर कार में बम ले जा रहें हैं | और कहीं बड़ा धमाका करने वाले हैं | एस ए एस के स्नाइपर दस्ते के शार्पशूटर ने दोनों जिहादियों को एक ही गोली से मार डाला था|

सूत्रों के मुताबिक आई एस आई एस ने इराकी टीम के साथ मिल कर फैजुल्लाह के एक कारखाने में धमाका करने के बाद एस ऐ एस के एक सिपाही पकड़ लिया कहा जा रहा है की इस हमले में इराकी सेना के कई जवान शहीद हो गए और चार जवानों के गंभीर रूप से घायल होने की भी खबर है|

धमाके के बाद हिन्दू गोरखा के पास ब्रिटिश गोरखा जवान द्वारा भेट की गयी खुखरी के अलावा कोई और हथियार नहीं बचा तो उसने मन ही मन ये ठान लिया की मरना ही है तो दो-चार को मार के ही मरूँगा| उसने हिम्मत नहीं हारी और खुखरी लहराना शुरू किया | एक ही वार में पहले आतंकवादी का सर धड़ से अलग कर दिया दूसरे के गले की नली काट डाली और तीसरे पर किसी खूंखार शेर की तरह टूट पड़ा और उसकी जान लेने के बाद ही छोड़ा ये देखकर बाकी के डरपोक आतंकवादी कायरों की तरह दुम दबा कर भाग खड़े हुये।

जब वो वापस पहुंचा तो उसके साथियों को लगा की वह गंभीर रूप से घायल हो गया है क्योंकि वो पूरी तरह खून से सना हुआ था | बाद में पता चला की वो खून उसका नहीं बल्कि उन लोगों का था जो उसके हाथों मारे गए थे|

जब उससे पूछा गया तो उसने कहा की जब तक उसकी आखिरी सांस है तब तक वो आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा और अपनी आखिरी सांस तक ये कोशिश करेगा की कोई भी आतंकी हमला कामयाब न हो पाए।

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